कठुआ। रियासत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही भटिंडा-श्रीनगर-गैस पाइप लाइन के रूट में बदलाव का प्रस्ताव खारिज हो गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सुझाव और पाइप लाइन बिछाने जा रही कंपनी के विशेषज्ञों ने सुरक्षा के पहलुओं का तर्क देकर रूट बदलने के प्रस्ताव को नकार दिया है। यानी एक हजार करोड़ की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का रूट शहर के निचले इलाकों से होकर ही गुजरेगा। इसके लिए क्रियान्वयन एजेंसी जीएसपीएल को हरी झंडी दे दी गई है।
गौरतलब है कि राज्य के कश्मीर संभाग में सड़क संपर्क ठप होने की सूरत में गैस की आपूर्ति करवाना टेढ़ी खीर बन जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए लगभग एक हजार करोड़ की लागत से गैस पाइप लाइन बिछाने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया। कायदे से इस परियोजना को अब तक अंजाम तक पहुंच जाना चाहिए था, लेकिन गैस पाइप लाइन के लिए अनिवार्य लैंड यूज एक्ट का प्रावधान रियासत में मौजूद नहीं होने की वजह से परियोजना अधर में लटक गई। विशेष अध्यादेश के बाद इस्तेमाल भर के लिए भूमि अधिग्रहण का कानूनी मसौदा पारित किया गया, जिसके बाद इस परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए हलचल तेज हो गई। कुछ सप्ताह पूर्व ही जीएसपीएल प्रतिनिधियों को जिला प्रशासन ने रूट बदलने की संभावनाएं तलाशने को कहा था। जिला प्रशासन इस परियोजना को पंजाब से पहले लखनपुर और फिर नेशनल हाईवे के किनारे से आगे ले जाने के पक्ष में था।
प्रशासन का तर्क था कि नेशनल हाईवे के निकट से गैस पाइप लाइन गुजरने पर कई महत्वपूर्ण स्टेशन इस लाइन का लाभ ले सकेंगे। लेकिन जीएसपीएल के विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गैस पाइप लाइन को आबादी वाले इलाकों से गुजारना जोखिम भरा होता है। इसी के चलते उन्होंने शहर के निचले मैदानी इलाके को गैस पाइप लाइन के रूट के लिए चुना। इस संबंध में जिला उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गैस पाइप लाइन का रूट बदलने की संभावनाओं को विशेषज्ञों की टीम ने खारिज कर दिया है।