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बिमारी, लाचारी पर भारी पड़ा कर्तव्य का जज्बा

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कठुआ। 106 वर्षीय वर्षीय ज्ञानो देवी चलने में असमर्थ हैं, लेकिन लोकतंत्र के प्रति उनके कर्तव्य का जज्बा वीरवार को देखने को मिला। व्हीलचेयर पर परिजनों की मदद से मतदान केंद्र पर पहुंची ज्ञानो देवी के जज्बे को चुनाव अधिकारियों ने भी सलाम किया। बाकायदा ज्ञानो देवी का हार पहनाकर एआरओ बनी ने स्वागत किया गया। बसोहली के द्रम्मण में सौ साल पूरे करने वाले अश्रु राम की हिम्मत की भी लोगों ने जमकर तारीफ की। वह उम्र के इस पड़ाव पर होने बावजूद तीन किलोमीटर का पैदल सफर तय कर मतदान केंद्र तक पहुंचे और वोट डाला। उन्होंने बताया कि उनका इलाका काफी पिछड़ा हुआ है। आज भी लोगों को कई-कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। अगली पीढ़ी को यह मुसीबतें न झेलनी पड़ें इसके लिए वोट डालने आया हूं। इसके अलवा बिलावर की 95 वर्षीय नसीब देवी, बसोहली के उत्तम चंद पाठक (92) और खैर दीन (95) व हीरानगर की बिशनो देवी (105) सहित जिलाभर के कई बुजुर्गों ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए चुनावी यज्ञ में आहुतियां डालीं।
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वीरवार को लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत उधमपुर-डोडा सीट पर मतदान हुआ। उम्र दराज लोगों ने साबित कर दिया कि देश के प्रति अपना फर्ज निभाने में बीमारी या लाचारी कभी भी आड़े नहीं आ सकती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने हर लोकसभा चुनाव में इसी जज्बे के साथ वोट दिया है। भले ही जीते हुए नुमाइंदों से उन्हें कभी कोई काम नहीं पड़ा हो लेकिन क्षेत्र की तरक्की के लिए उनका एक-एक वोट भी महत्व रखता है।

जोश के आगे फीकी पड़ी शारीरिक अक्षमता
बसोहली के जतिन (19) शारीरिक रूप से अक्षम हैं, लेकिन वह देश का भविष्य बदलकर अपना भविष्य भी सुरक्षित करना चाहते हैं। लोकतंत्र की मजबूती के लिए बैसाखी के सहारे पहुंचे जतिन ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उनका कहना है कि लोकतंत्र ही सशक्त देश का आधार है। देश के युवाओं ने यदि सही तरीके से अपना फर्ज निभाया तो देश तरक्की की राह पर चलेगा। बहानेबाजी कर वोट नहीं डालने वालों को बुरे या अच्छे नेताओं की बात करने का हक भी नहीं है। जो देश के लिए अपना फर्ज नहीं निभा सकता वो सच में लाचार है।
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सात फेरों के बाद निभाया मतदान का फर्ज
बसोहली के दूर दराज सियालग गांव में शादी के बंधन में बंधने के बाद पत्नी को लेकर दूल्हा सीधे मतदान केंद्र पहुंचा। सेहरा लगे, गले में नोटों का हार डाले और अचकन पहने सुरेश ठाकुर मतदान केंद्र पहुंचे तो चुनाव अधिकारियों ने भी उनका हौसला बढ़ाया। यहां अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद दूल्हा-दुल्हन घर की ओर रवाना हुए। सियालग के सुरेश ठाकुर और उनकी पत्नी दोनों ने बाकायदा अपने मतदान की तस्वीर भी सांझा की। सुरेश ठाकुर का गांव सियालग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहा है। सुरेश कहा कि उनका एक वोट देश की तरक्की के लिए महत्व रखता है। शादी के अपने फर्ज को निभाने के बाद लोकतंत्र के लिए अपना फर्ज भी निभा दिया है।
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