अठारह मई को कठुआ जिले के घाटी गांव में अपर प्राइमरी स्कूल के 80 बच्चों के बीमार होने की एक बड़ी वजह दूषित पानी निकल कर आई है। जिला प्रशासन द्वारा जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पानी को ही बीमारी की वजह बताया है, लेकिन इस मामले के एक अन्य पहलू से पर्दा उठना अभी बाकी है। एफएसएल लैब में जांच के लिए भेजे गए खाने के सैंपल की रिपोर्ट अभी तक नहीं पहुंची है।
हैरत की बात यह है कि जांच कमेटी पानी और स्कूल में पड़े राशन की जांच रिपोर्ट को ही अंतिम मान रही है, जबकि पके हुए खाने के सैंपल पुलिस ने मौके पर जाकर भरे थे, जिन्हें एफएसएल लैब में जांच के लिए भेजे गए हैं।
जांच कमेटी के सदस्यों में शामिल मुख्य चिकित्सा अधिकारी बसंत कुमार शर्मा ने बताया कि जांच कमेटी ने रिपोर्ट फाइनल कर दी है। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने स्कूल के किचन से दाल और चावल समेत मसालों के सैंपल लिए थे।
पानी के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए थे। रिपोर्ट में साफ हुआ है कि पानी ही बच्चों के बीमार होने का कारण रहा। इस रिपोर्ट को मुख्य शिक्षा अधिकारी के पास भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि जांच कमेटी ने जब स्कूल में दौरा किया था तो पानी में भी बदबू आ रही थी।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने साफ किया कि उस दिन पकाए गए खाने केसैंपल जांच कमेटी ने नहीं भरे थे। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भीहै कि आखिर जांच कमेटी नेपके खाने के सैंपल भरने से परहेज क्यों किया।
बड़ी बात यह है कि मामला सामने आने के बाद अमर उजाला ने स्कूल के हेडमास्टर अंग्रेज सिंह से बात की थी तो उन्होंने भी साफ कहा था कि रोंगी की दाल जो बच्चों को परोसी गई थी उसे कुक को उबालने के लिए एक दिन पहले ही दे दिया गया था।
सिटी थाना प्रभारी एसएस जोहल ने बताया कि पुलिस ने मामले की जानकारी मिलते ही पके खाने के सैंपल अपने स्तर पर भर लिए थे, जिन्हें एफएसएल लैब में जांच के लिए भेज दिया गया था। कुछ ही दिनों में रिपोर्ट मिल जाएगी जिसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा।