कठुआ। जिले भर में बीते तीन दिनों तक हुई लगातार बारिश से जहां ज्यादातर इलाकों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट चुका है। 72 घंटे की भारी बारिश से कई सड़कें बह गई हैं, नये और पुराने पुल जमीन में धंस गए हैं। ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों से कुल 670 लोगों को अगल-अलग में स्थापित किए गए राहत शिविरों में शरण दी गई है।
जिला मुख्यालय में स्थापित आपातकालीन संचालन केंद्र (ईओसी) के मुताबिक अब तक जिला प्रशासन की ओर से 17 राहत शिविर स्थापित किए जा चुके हैं। यहां सैकड़ों की संख्या में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पीड़ित परिवारों को रखा गए है। सबसे ज्यादा सात राहत शिविर कठुआ शहर के आसपास के इलाके में स्थापित किए गए हैं। जहां वर्तमान तक 232 को ठहराया गया है। इसमें से कुछ सेंटर 16 अगस्त को जुथाना के जोड़ और जंगलोट के बागड़ा गांव में बादल फटने के बाद आई बाढ़ के प्रभावितों को रखा गया है।
घाटी औद्योगिक क्षेत्र, घाटी गांव का पंचायत घर, हाई स्कूल घाटी, मिडिल स्कूल घाटी, मिडिल स्कूल पंजबारी, हाई स्कूल लखनपुर, सिंचाई विभाग का विश्राम गृह करड़ोह शामिल है। वहीं महानपुर में स्थापित दो राहत शिविरों में कुल 24 लोगों को शरण दी है। हीरानगर में मिडिल स्कूल में 20 लोग, बिलावर के दो राहत शिविरों मिडिल स्कूल कटली और कोघ में 55 लोगों को, मढ़ीन के हाई स्कूल सब्बाचक में 23 और ब्लॉक विकास अधिकारी दफ्तर डुग्गेन में छह लोगों को रखा गया है। सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित बसोहली में स्थापित दो शिविर राधा स्वामी आश्रम और ब्लॉक हेडक्वार्टर में 300 से अधिक लोगों को शरण दी गई है।
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जिला प्रशासन द्वारा स्थापित राहत शिविर ठहरे लोगों की संख्या
1. घाटी, लखनपुर व कठेरा के सात शिविर में 232
2. बसोहली के दो शिविरों में 300
3. महानपुर के तीन शिविर 24
4. बिलावर में दो शिविर 55
5. मढ़ीन का छब्बेचक शिविर 23
6. बीडोओ डुगैन 06
कुल शिविर-17 670