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Kathua News: जिले में 67 फीसदी कृषि योग्य भूमि पर सूखे का संकट

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-बनी के पहाड़ों पर अच्छी बारिश हुए साल गुजरा लहसुन की फसल सूखने की कगार पर, सब्जियों पर भी असर
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- आखिरी बारिश 77 दिन पहले 13 सितंबर को 35.5 एमएम हुई थी
- 25 हजार हेक्टेयर भूमि सीधे तौर पर बारिश से होने वाली सिंचाई पर निर्भर

संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पिछले 77 दिन से बारिश के बिना कठुआ जिले के कई इलाकों में सूखे के हालात बन गए हैं। खासकर बनी, बिलावर, बसोहली और राजमार्ग के ऊपरी हिस्से में कंडी का इलाका बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।
यहां कई जगह भूजल स्तर पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है, वहीं फसलों की बुवाई का काम भी पिछड़ चुका है। खेतों में लगी सब्जियां पानी के बिना सूख रही हैं। किसान नई पनीरी को भी रोपने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। बारिश की कमी आम जनजीवन को प्रभावित करने लगी है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो दिसंबर के पहले सप्ताह में भी राहत के आसार नजर नहीं आ रहे। जिले में 67 फीसदी कृषि योग्य भूमि सूखे की चपेट में आ चुकी है। आखिरी बारिश 13 सितंबर को 33.5 एमएम दर्ज की गई थी। इसके बाद कई बार बदरा छाए और बिना बरसे ही निकल गए।
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आम तौर पर 21 नवंबर तक ज्यादातर इलाकों में गेहूं की बुवाई कर ली जाती है। कंडी के इलाकों में बारिश न होने से फसल की बुवाई हो ही नहीं पा रही है। इसके बाद किसानों के पास दूसरा मौका 7 दिसंबर तक है। यह दोनों समय निकलने के बाद फिर लेट वैराइटी की फसल ही लगाई जा सकेगी। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो बनी में लगभग 1340 कनाल में लगाया लहसुन सूखने के कगार पर पहुंच गया है। इसके अलावा कंडी से लेकर पहाड़ों तक सरसों, चने और तोरिया की फसल भी पानी की कमी से जूझ रही हैं। बारिश नहीं हुई तो इनका भी तबाह होना तय है।
जिले में 61 हजार हेक्टेयर रकबे में खेती की जाती है। 46 हजार हेक्टेयर पर मुख्य रूप से गेहूं की बिजाई होती है। जिले की 25 हजार हेक्टेयर भूमि सीधे तौर पर बारिश से होने वाली सिंचाई पर निर्भर है। हीरानगर और कठुआ की लगभग 20,515 हेक्टेयर भूमि पर किसानों के पास सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं हैं। सबसे खराब हालात बनी और लोहाई मल्हार के इलाकों में है जहां पांच हजार हेक्टेयर भूमि पर बर्फबारी की मार पड़ जाती है।
यही कारण है कि यहां के किसान अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में ही रबी की फसल लगा लेते हैं। इस बार के हालात देखकर किसान भी परेशान हैं। उधर, मुख्य कृषि अधिकारी संजीव राय ने बताया कि ज्यादातर गैर सिंचित इलाकों में फसल की बुवाई के लिए किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। बनी में लहसुन और कंडी क्षेत्र में सरसों, चने, तोरिया की फसल बारिश न होने से प्रभावित हो रही है।
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कोट...


बारिश न होने से कंडी क्षेत्र में फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। मौसम का पूर्वानुमान के मुताबिक अगले एक सप्ताह में भी बारिश के आसार नजर नहीं आ रहे।

डॉ. विशाल महाजन, प्रमुख वैज्ञानिक
कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ
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