कठुआ। जिले में डेंगू का डंक तेजी से बढ़ने लगा है। इस सीजन में अब तक छह मामले प्रकाश में आ चुके हैं। ताजा रिपोर्ट में लगाए गए दो दर्जन के लगभग संदिग्ध सैंपल में से तीन मरीजों को डेंगू की पुष्टि हो गई है। हालांकि इनके नाम और पते अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उधर, शहर में तेजी से डेंगू के लक्षण सामने आ रहे संदिग्ध बुखार के मामले बढ़े हैं।
जिले में डेंगू के डंक का प्रभाव बढ़ता ही जा रहा है। हैरानी की बात है कि डेंगू की दस्तक के बाद भी न तो नगर परिषद हरकत में आई है और न ही स्वास्थ्य विभाग। न तो सार्वजनिक तौर पर कहीं फॉगिंग की जा रही है और न ही कहीं मैलाथियान स्प्रे। ऐसे में डेंगू के तेजी से बढ़ने की आशंका है जो शहर और ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए अच्छी खबर नहीं है। गत वर्ष भी ऐसी ही लापरवाही के चलते शहर के वार्ड पांच और छह से सौ से अधिक मामले संदिग्ध बुखार के सामने आए थे जिनकी जांच के बाद कई लोगों को डेंगू पॉजीटिव भी पाया गया था।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजीव गंडोत्रा ने बताया कि शहर में फॉगिंग अभियान शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वार्ड सात में फॉगिंग करा ली गई है और जल्द ही शहर के अन्य वार्डों में भी फॉगिंग कराई जाएगी।
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नगर परिषद ने जारी की हिदायत
- घर के अंदर और आस-पास पानी जमा न होने दे। कोई भी बर्तन में खुले में पानी न जमने दे।
- बर्तन को खाली कर रखें या उसे उलटा कर कर रख दें।
- अगर आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा कर रखते हैं तो उसे ढक कर रखें।
- अगर किसी चीज में हमेशा पानी जमा कर रखते हैं तो पहले उसे साबुन और पानी से अच्छे से धो लेना चाहिए, जिससे मच्छर के अंडे को हटाया जा सके।
- घर में कीटनाशक का छिड़काव करें।
- कूलर का काम न होने पर उसमें जमा पानी निकालकर सुखा कर रख दें। जरूरत होने पर कूलर का पानी रोज नियमित बदलते रहें।
-किसी भी खुली जगह में जैसे की गड्ढों में, गमले में या कचरे में पानी जमा न होने दें। अगर पानी जमा है तो उसमें मिट्टी डाल दें।
- खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखें। शाम होने से पहले दरवाजे बंद कर दें।
- ऐसे कपडे़ पहनें जो पूरे शरीर को ढक सकें।
- रात को सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करें।
- आस-पास के लोगों को भी मच्छर फैलने से रोकने के लिए प्रोत्साहित करे।
- अपने आस-पास में अगर कोई डेंगू बुखार के मरीज का पता चलता है तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग एवं नगर परिषद को दे, जिससे तुरंत मच्छर विरोधी उपाय योजना की जा सके।
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डेंगू बुखार क्या है ?
डेंगू बुखार संक्रमण से होने वाली बीमारी है। एक बार डेंगू बुखार होने के बाद इस संक्रमण से मरीज को लंबे समय के लिए प्रतिरोधक क्षमता मिल जाती है, लेकिन दूसरी बार डेंगू बुखार होना जानलेवा साबित हो सकता है। दूसरी बार डेंगू बुखार को डेंगू हेमोरहेजिक फीवर कहते हैं। यह बुखार हवा, पानी, साथ खाना खाने या छूने से नहीं फैलता। यह संक्रमित मादा एडीज ऐजेप्टी मच्छर के काटने से होता है। डेंगू संक्रमित व्यक्ति को दूसरे मच्छर के काटने से यह संक्रमण उस मच्छर में दाखिल हो जाता है, जिससे अन्य लोगों को भी इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
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एडीज ऐजेप्टी मच्छर की पहचान
-यह दिन में ज्यादा सक्रिय होते हैं।
-इन मच्छर के शरीर पर चीते जैसी धारिया होती है।
-ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते हैं।
-ठंडे और छांव वाली जगहों पर रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
-पर्दों के पीछे या अंधेरे वाली जगह पर रहते हैं।
-घर के अंदर रखे हुए शांत पानी में प्रजनन करते हैं।
- प्रजनन क्षेत्र के 200 मीटर की दूरी के अंदर ही उड़ते हैं।
-गटर या रास्ते पर जमा पानी में कम प्रजनन करते हैं।
-पानी सूख जाने के बाद भी इनके अंडे 12 महीनों तक जीवित रह सकते हैं।
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डेंगू के लक्षण
संक्रमित मच्छर के काटने के तीन से चौदह दिन के भीतर डेंगू के लक्षण दिखाई देते हैं। इनमें तेज ठंडी लगकर बुखार आना, सरदर्द, आंखों में दर्द, बदन दर्द/जोड़ो में दर्द, भूख कम लगना, जी मिचलाना, उलटी दस्त लगना, चमड़ी के नीचे लाल चकत्ते आना, गंभीर स्थिति में आंख, नाक से खून भी निकल सकता है।
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इलाज क्या है?
डेंगू की रोकथाम ही इसका सबसे बेहतर इलाज है। रोगी को डाक्टर की तुरंत सलाह लेकर उसके अनुरूप ही दवा लेनी चाहिए। इस दौरान बुखार में सरदर्द की दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए। नियमित रूप से रक्त में प्लेटलेट कांउट की जांच करानी चाहिए।