ग्रामीणों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा आज भी दूर की कौड़ी संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। ग्रामीणों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा आज भी दूर की कौड़ी बनी हुई है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले की कुल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में से 60 फीसदी केंद्र बिना चिकित्सा अधिकारियों से चल रही है। इसमें भी सबसे ज्यादा प्रभावित पहाड़ी इलाके के तीन मेडिकल ब्लॉक बनी, बसोहली और बिलावर हैं, जहां चिकित्सा अधिकारियों की नाम मात्र की ही तैनाती की गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले भर में कुल 52 पीएचसी चलाए जा रहे हैं। इसमें से 23 पीएचसी, 26 नई तरह की पीएचसी (एनटीपीएचसी) और तीन शहरी पीएचसी है। मगर कुल 31 ऐसी पीएचसी हैं, जहां एक भी चिकित्सा अधिकारी मौजूद नहीं है। इसमें बसोहली और हीरानगर ब्लॉक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जहां सभी स्वीकृत पदों के खिलाफ एक भी पद भरा हुआ नहीं है। इसके अलावा पूरे जिले की पीएचसी के लिए कुल 82 चिकित्सा अधिकारियों के पद स्वीकृत हैं। जिसमें में 55 पद वर्तमान में खाली पड़े हुए हैं। सिर्फ 27 पदों की ही भरा गया है। स्थानीय लोगों को बुनियादी उपचारात्मक देखभाल के लिए मीलों का सफर तय कर नजदीक की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जाने को मजबूर हो रहे है।
बसोहली मेडिकल ब्लॉक
पीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
6 12 12
एनटीपीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
4 5 5
...............बनी मेडिकल ब्लॉक
पीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
3 6 4
एनटीपीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
2 2 2
-
....हीरानगर मेडिकल ब्लॉक
पीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
3 3 3
एनटीपीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
4 4 4
-
.....................परोल मेडिकल ब्लॉक
पीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
4 8 4
एनटीपीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
5 9 5
................बिलावर मेडिकल ब्लॉक
पीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
8 16 7
एनटीपीएचसी स्वीकृत पद रिक्त पद
10 14 9
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उपमंडल स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञों और पीएचसी में चिकित्सा अधिकारियों को उपलब्ध करवाने के लिए विधानसभा सत्र के दौरान स्वास्थ्य मंत्री के संज्ञान में लाया चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जल्द ही रिक्त पदों को भरा जाएगा। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने रिक्त पदों के भरे जाने तक हर महीने बनी विधानसभा में विशेषज्ञों डॉक्टरों की मदद से दो मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं। उपमंडल स्तर के अस्पतालों में डाक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार एक विशेष नीति भी बना रही है।
-डॉ. रामेश्वर सिंह, विधायक बनी।