मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने घरेलू हिंसा के मामले में दायर एक याचिका में पीड़ित महिला को भरण-पोषण और सुरक्षा संबंधी बड़ी राहत दी है। कोर्ट के आदेश के अनुसार पीड़िता को उसके पति द्वारा हर महीने 25 सौ रुपये और तीनों बच्चों को एक-एक हजार रुपये प्रति माह भरण-पोषण के रूप में देना होगा। इसके अलावा कोर्ट ने प्रतिवादी पति को और उसके परिवार को महिला के परिवार के विरुद कोई हिंसात्मक कार्य न करने और उसके निवास या कार्यस्थल में प्रवेश न करने का निर्देश दिया है।
पीड़ित महिला निवासी धार महानपुर ने 15 अप्रैल 2024 को कोर्ट में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत याचिका दायर कर न्यायालय से भरण-पोषण और सुरक्षा संबंधी राहत की अपील की थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसका विवाह वर्ष 2014 में हुआ था। इसके बाद महिला के पति और उसके परिवार वालों उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसी बीच पीड़िता ने तीन बच्चों को जन्म दिया जिनकी आयु पांच वर्षए आठ वर्ष और नाै वर्ष वर्ष है।
उसका पति नशे की लत के चलते हमेशा दहेज को लेकर प्रताड़ित करता रहता था। इसके चलते पीड़िता ने पति कर घर छोड़ कर मायके में रहने लगी। हालांकि प्रतिवादियों ने कोर्ट में आपत्तियां दायर कर सभी तरह के आरोपों से इंकार किया था। उन्होंने महिला पर आरोप लगाया था कि उसके किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध के चलते घर से भाग गई थी। जब उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में की तो पीड़िता ने उनके ऊपर घरेलू हिंसा के तहत कोर्ट में याचिका दायर की गई। इसके बाद प्रतिवादियों ने कोर्ट से इस अपील को खारिज करने की अपील की थी, लेकिन उसके बाद कभी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। जिसके चलते कोर्ट ने मामले में एकतरफा फैसला सुनाया गया।