फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

थैं डैम प्रभावितों के हक दिलाने की कवायद तेज

विज्ञापन
विज्ञापन
कठुआ। थैं डैम प्रभावितों को दशकों बाद उनके हक दिलाने के लिए कवायद तेज हो गई है। एडीसी बसोहली तिलक राज थापा ने हाल ही में मामले को लेकर रंजीत सागर बांध के मुख्य अभियंता को पत्र लिखा है। पंजाब की ओर से भेजी गई 861 प्रभावितों को नौकरी की सूची को भी वेरिफाई किया जा रहा है। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर को मिलने वाले 115 करोड़ के बकाया मुआवजे को जल्द जारी किए जाने की बात भी रखी गई है। उधर, मामले में तेजी लाने के लिए 13 मई को श्रीनगर में उच्च स्तरीय बैठक भी होने जा रही है।
विज्ञापन

राज्य प्रशासनिक परिषद की ओर से 28 सितंबर 2018 को शाहपुर कंडी परियोजना के संबंध में हुए समझौते के विशोधन की मंजूरी के बाद अब सरकार पंजाब सरकार क साथ समझौते के पहलुओं का उठाने लगी है। शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर विशोधन में जम्मू कश्मीर और पंजाब सरकार के मुख्य सचिवों के साथ-साथ सिंधु जल के भारतीय कमीशन के अधिकारी भी मौजूद रहे। समझौते में हुए विशोधन के अनुसार पंजाब सरकार को रंजीत सागर बांध प्रभावित 861 विस्थापित परिवारों को नौकरियां राहत और पुनर्वास योजना के तहत देनी हैं। इसके साथ ही लगभग 115 करोड़ रुपये का मुआवजा भी पंजाब सरकार को भू-अधिग्रहण की एवज में जल्द से जल्द देना है। फरवरी में जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से इसे लेकर कवायद शुरू की गई थी जो आगे बढ़ रही है। रावी तवी इरिगेशन कांप्लेक्स विभाग के मुख्य अभियंता ने फरवरी माह में ही इस संदर्भ में आरसीसी अपर डिवीजन के कार्यकारी अभियंता को मामला जिला उपायुक्त और कलेक्टर भूमि अधिग्रहण के साथ उठाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जल्द से जल्द इन पहलुओं से जम्मू कश्मीर और यहां के विस्थापित परिवारों को अपना हक मिल सके, जिसके बाद बीते कुछ माह में कार्रवाई आगे बढ़ी और अब दोनों राज्य के बीच कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है।
.........................
40 साल से न्याय की राह देख रहे कई प्रभावित परिवार
20 जनवरी 1979 का वो दिन, जब रावी दरिया पर रंजीत सागर (थीन) बांध और शाहपुर कंडी परियोजना को लेकर पंजाब, जम्मू कश्मीर और हिमाचल के बीच समझौता हुआ। 1995 में जैसे ही रंजीत सागर बांध के जलाशय को भरने का समय आया सैकड़ों परिवारों के विस्थापन का भी समय शुरू हो गया। परिवारों का यह विस्थापन वर्ष 2002 तक जारी रहा। जम्मू कश्मीर के 22 गांव के 861 परिवार जिनकी जमीनें बांध जलाशय में गईं वो आज तक न्याय की आस देख रहे हैं। यही नहीं बांध विस्थापितों का दर्द यह भी है कि उन्हें प्रभावित जमीनों का उचित और पूरा मुआवजा भी परियोजना शुरू होने के लगभग 25 साल बाद तक नहीं मिला है, लेकिन अब इन परिवारों के लिए रोशनी की एक किरण नजर आई है।
विज्ञापन

......................
बसोहली डैम ओस्ती संघर्ष समिति ने की जल्द राहत देने की मांग
वर्षों से बांध विस्थापितों के लिए संघर्ष कर रही बसोहली डैम ओस्ती संघर्ष समिति के अध्यक्ष तेजिंद्र सिंह गोल्डी ने बताया कि यदि इन पहलुओं पर जल्द कार्रवाई होती है तो विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर होगी। उन्होंने बताया कि लगभग 250 परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिला है। जम्मू कश्मीर के 22 गांव की 117.4 एकड़ जमीन रंजीत सागर बांध के जलाशय में समा गई लेकिन यहां के लोगों को आज तक उनका हक नहीं मिला। रोजगार में चतुर्थ श्रेणी या फिर इससे भी कम श्रेणी पर नियुक्त किया गया है। पंजाब सरकार नियुक्त हुए इन कर्मियों को पिछले कई वर्षों से लगभग तीन सौ किलोमीटर दूर पोस्टिंग दे चुकी है। न तो इनकी आवाज पंजाब सरकार से कोई उठाता है और न ही इन्हें वापस लाने का कोई फैसला होता है। प्रभावितों की यह भी मांग है कि राहत और पुनर्वास के तहत उन्हें कालोनी में बसाया जाए। पहले लगे 769 लोगों में से लगभग पांच सौ लोग ऐसे हैं जिनके रिहाइश कहां और उन्हें किस एवज में लगाया गया है यह आज तक समिति पता करवाते हुए थक चुकी है। रोजगार देने के मामले में भी संभवता धांधली की गई है। असल विस्थापितों को तो उनके हक मिल ही नहीं पाए हैं। यदि इन लोगों को मुआवजा और रोजगार मिलता है तो यह हर विस्थापित के संघर्ष की जीत होगी।
................
रावी दरिया पर शाहपुर कंडी तैयार कर पाकिस्तान का पानी रोकना चाहता है भारत
उड़ी हमले के बाद से केंद्र सरकार पाकिस्तान को जाने वाले पानी को रोकने की कवायद में जुट चुकी थी। केंद्र की ओर से पूर्व के दशक में ही राष्ट्रीय परियोजना के रूप में उज्ज परियोजना और शाहपुर कंडी परियोजना को मंजूरी दे दी गई थी। इन नदियों का सिंधु जल समझौते से कोई लेना देना नहीं। यही वजह थी कि भारत सरकार जल्द से जल्द यहां से व्यर्थ पाकिस्तान को बहने वाले पानी को अपने ही क्षेत्रों की ओर डायवर्ट कर लेना चाहती है। पुलवामा हमले के बाद इस कड़ी में और तेजी लाई गई। दरअसल फरवरी 2008 में शाहपुर कंडी योजना को केंद्र सरकार के जल संसाधन मंत्रालय ने राष्ट्रीय योजना घोषित किया। योजना आयोग ने इस परियोजना में 2285.81 क रोड़ की राशि को मंजूरी दी थी। इसमें सिंचाई के लिए 28.61 फीसदी और बिजली उत्पादन के लिए 71.39 फीसदी राशि को बांटा गया है। वहीं राष्ट्रीय योजना की गाइड लाइन के अनुसार केंद्र सरकार सिंचाई घटक में नब्बे फीसदी निवेश करने, जबकि पंजाब सरकार द्वारा दस फीसदी निवेश किए जाने का भी प्रावधान है। पंजाब में शाहपुर कंडी परियोजना से जहां पांच हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने का प्रावधान है, वहीं जम्मू कश्मीर में 32 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई को लेकर शाहपुर कंडी योजना में प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही पंजाब सरकार 206 मेगावाट बिजली के उत्पादन को लेकर भी इस योजना को शुरू करने जा रही है। जिस पर काम भी नवंबर माह से शुरू हो चुका है। रंजीत सागर बांध से बिजली उत्पादन के बाद रावी के पानी का कुछ हिस्सा पंजाब की ओर बह जाता था जबकि जम्मू कश्मीर और पंजाब के इलाकों को इससे सिंचाई संभव हो सकती थी, लेकिन परियोजना पर वर्ष 2013 में शुरू हुए काम के बाद कुछ ही महीनों के भीतर जम्मू कश्मीर और पंजाब के बीच मतभेद सामने आ गए और काम रूक गया था। इसके बाद पीएमओ राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने मध्यस्तता कर दोनों सरकारों के बीच मसले को सुलझाने का काम किया। आखिरकार 2018 में इस पर जम्मू कश्मीर और पंजाब सरकार के बीच समझौते का विशोधन हुआ और मुहर लग गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें