कठुआ। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एससी/एसटी एक्ट मामले पर दिए फैसले के विरोध में भारत बंद का असर शहर में नहीं दिखा। केवल जंगलोट मोड़ के पास की मार्केट की दुकानें कुछ समय के लिए बंद रहीं। वहीं शहर में बहुजन समाज पार्टी ने जंगलोट मोड़ के पास हाईवे जाम किया और फिर रैली निकालते हुए जिला सचिवालय पहुंचे। जहां कालेज मार्ग पर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सामाजिक एकता मंच के सदस्यों ने काले झंडे लेकर मुखर्जी चौक पर धरना दिया। बहुजन समाज पार्टी के राज्य प्रधान सोमराज मजोत्रा के नेतृत्व में जंगलोट मोड़ पर एकत्रित हुए लोगों ने हाइवे जाम किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
इस दौरान मजोत्रा ने कहा कि केंद्र में जब से भाजपा की सरकार आई है दलित वर्ग के लोगों के साथ भेदभाव की घटनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायलय इस समय सरकार के आदेशों पर कार्य कर रहा है। दलितों के साथ सरकार बनते ही भेदभाव और अन्याय शुरू हो गया था।
साफ है कि सरकार दलितों को सहन नहीं कर रही है क्योंकि इस सरकार सरकार आरएसएस के बताए मार्ग पर चलते हुए काम कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार ने अगर इस आदेश की वापसी के लिए कुछ नहीं किया तो वह उग्र रुख अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
उन्होंने कहा कि पहले सदियों तक उनका शोषण किया जाता रहा और अब लोकतंत्र में भी उनके साथ सरकार ऐसा व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एससी/एसटी एक्ट उन्हें संविधान ने दिया है लेकिन सरकार के इशारों पर इस अधिकारी को उनसे छीना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज देश इतना विकास नहीं कर पाया है कि दलितों के प्रति अपना मानसिकता को छोड़े। ऐसे में सरकार ने इस मानसिकता को मजबूत करने का काम किया है। वहीं बाबा साहब भीम राव अंबेडकर सामाजिक एकता मंच के ध्यानचंद ने कहा कि उन्होंने इस फैसले के विरोध में काले झंडे लेकर धरना दिया है, ताकि लोग जाग सके और दलित वर्ग को आ रही मुश्किलों के लिए एकजुट हो पाएं।
उन्होंने कहा कि दलित वर्ग को काफी मुश्किलें हैं लेकिन जो बदलाव किया गया है वह नहीं होना चाहिए, ताकि न्याय में विश्वास बना रहे। भारत सरकार की दलित विरोधी नीति अगर पहले जैसे नहीं की गई तो 14 अप्रैल को रैली होगी।