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सूरज की त्योरियां चढ़ते ही भड़कने लगा दावानल

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कठुआ। इस बार गर्मी का मौसम किसानों के लिए आफत बनकर आया है। पारा चढ़ते ही दावानल भड़कने लगा है, जो पलक झपकते ही किसानों की मेहनत को जलाकर राख कर देता है। जब तक आग बुझाने के लिए दमकल कर्मी मौके पर पहुंचते हैं, अक्सर तब तक सैकड़ों कनाल फसल जल कर राख हो चुकी होती है। रविवार को आग लगने के ऐसे ही दो मामलों में कठुआ और हीरानगर में लगभग 600 कनाल गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। पकने के बाद सोने की तरह चमक रही गेहूं की फसल की कटाई का इंतजार करते किसानों पर यह कहर बनकर बरपा है।
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हीरानगर सब डिवीजन के गांव मढीन में रविवार दोपहर लगभग 200 कनाल जमीन पर लगी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। उधर साथ लगते चक्क चंगी, चक्क चाढ़का, बन मनहासां में भी 200 कनाल से अधिक फसल जलकर राख हो हुई। राजबाग से सटे जखोल के नजदीक खेतों में आग लगने की सूचना के बाद कठुआ से दमकल अमला रवाना किया, जिसके पहुंचने तक लगभग 150 कनाल फसल राख हो चुकी थी। हालांकि दमकल कर्मी आग को अधिक फैलने से रोकने में कामयाब रहे।
रविवार को ही कीड़ियां गंडियाल में लगभग 50 कनाल फसल आग भी भेंट चढ़ गई है। दमकल अमला रास्ता न होने की वजह से घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाया। स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पाया गया है। आग लगने के कारणों का पता तो नहीं चल पाया है।
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स्थानीय लोगों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार एक खेत में आग की लपटें देखी गई । इसके बाद गांव के सभी लोग खेतों की ओर भागे और अपने तरीके से आग बुझाने का प्रयास करने लगे। देखते ही देखते इसने भीषण रूप धारण कर लिया और आसपास के तमाम खेतों को अपनी चपेट में ले लिया। दमकल विभाग के अधिकारियों को सूचित किया गया। विभाग के कर्मचारियों ने आम लोगों के सहयोग से आग पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत की। घंटों मशक्कत करने के बाद आग पर काबू पा लिया गया लेकिन तब तक आग अपना कहर बरपा चुकी थी। मढ़ीन में 200 कनाल जमीन पर लगी फसल को राख होने से नहीं बचाया जा सका। स्थानीय किसानों का कहना है कि राजस्व विभाग व पुलिस खेतों में लगी आग के कारणों का पता लगाए। उन्होंने यह मांग भी की किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा देने का प्रबंध सरकार करें।
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