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उधारी पर चल रहा शाहपुर कंडी परियोजना का काम

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कठुआ। जम्मू-कश्मीर और पंजाब की महत्वाकांक्षी शाहपुर कंडी परियोजना उधारी पर चल रही है। ऐसा तब है जब परियोजना को दूसरी बार बमुश्किल काम शुरू हो पाया है और छह माह बीत चुके हैं। इस अवधि में न तो केंद्र सरकार और न ही पंजाब सरकार की ओर से परियोजना के लिए राशि जारी की गई है। परियोजना का क्रियान्वयन कर रही सोमा बुरैया कंपनी की उधारी परियोजना के काम को कभी भी लटका सकती है।
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परियोजना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मार्च के अंत तक कोई भी राशि जारी नहीं की गई है। वर्ष 2014 में जम्मू-कश्मीर सरकार ने जब काम बंद कराया था, उसके बाद से ही मशीनरी परियोजना स्थल पर पड़ी है। अधिकारी की मानें तो परियोजना का सिविल काम इस समय जारी है, जिसमें मैनपावर के साथ-साथ मैटेरियल और मशीनरी को प्रयोग में लाया जा रहा है। शुुुरुआती दौर में परियोजना को लेकर दिलचस्पी दिखाए जाने के बाद भी मार्च के अंत तक राशि नहीं जारी की गई है। ऐसे में अगली तिमाही में परियोजना को लेकर यदि राशि जारी नहीं होती तो इसका सीधा असर काम पर भी पड़ सकता है।
आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 20 जनवरी, 1979 को शाहपुर कंडी बांध परियोजना को लेकर जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बीच समझौता हुआ था। चार दशक से परियोजना को लेकर दोनों राज्यों में आम सहमति नहीं बन पा रही थी। 2008 में तत्कालीन सरकार ने इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करते हुए काम शुरू कराने के निर्देश दिए। हालांकि इसमें कुछ साल और लग गए। वर्ष 2013 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित हुई शाहपुर कंडी के पंजाब द्वारा शुरू कराए गए काम को जम्मू कश्मीर ने वर्ष 2014 में यह कहकर बंद करा दिया कि काम जम्मू कश्मीर के अधिकार क्षेत्र में चल रहा है। जम्मू कश्मीर सरकार जहां रंजीत सागर बांध के समय पर हुए समझौते में बिजली और पानी के नुकसान का मुआवजा चाहती थी, वहीं शाहपुर कंडी परियोजना में भी कुछ मतभेद उभरकर सामने आए। 2004 के वॉटर टर्मिनेशन एक्ट पर भी जम्मू कश्मीर सरकार को आपत्ति थी, जिसकी वजह से कई बार राज्य स्तरीय पहले के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया। तीन मार्च 2017 को पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद पंजाब और जम्मू कश्मीर राज्यों के सिंचाई सचिवों की द्विपक्षीय बैठक हुई, जिससे परियोजना को लेकर चल रहे दोनों राज्यों के मतभेद काफी हद तक कम हो गए। आखिरकार राज्य कैबिनेट ने मुहर लगाकर शाहपुर कंडी परियोजना का कार्य फिर शुरू किए जाने को भी हरि झंडी दिखा दी। वर्ष 2018 के नवंबर माह से बाकायदा फिर से काम शुरू करवाया गया। हैरानी की बात है कि दिसंबर माह में एक बार फिर शाहपुर कंडी परियोजना को वर्तमान सरकार ने भी राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया। ..................................
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जम्मू-कश्मीर को यह होना है लाभ
शाहपुर कंडी परियोजना से जम्मू-कश्मीर को जहां रंजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी से बीस फीसदी बिजली उत्पादन बस बार रेट पर हासिल होगा। वहीं बसंतपुर और लखनपुर लिफ्ट स्टेशनों से सालाना 14 करोड़ के खर्च की बचत भी होगी। 31380 हेक्टेयर भूमि को लखनपुर से लेकर विजयपुर तक सिंचाई के प्रचुर मात्रा में पानी हासिल होगा।
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क्या है शाहपुर कंडी परियोजना
फरवरी 2008 में शाहपुर कंडी योजना को केंद्र सरकार के जल संसाधन मंत्रालय ने राष्ट्रीय योजना घोषित किया। योजना आयोग ने इस परियोजना में 2285.81 करोड़ की राशि को मंजूरी दी थी। इसमें सिंचाई के लिए 28.61 फीसदी और बिजली उत्पादन के लिए 71.39 फीसदी राशि को बांटा गया है। वहीं राष्ट्रीय योजना की गाइड लाइन के अनुसार केंद्र सरकार सिंचाई घटक में 90 फीसदी निवेश करने, जबकि पंजाब सरकार द्वारा दस फीसदी निवेश किए जाने का भी प्रावधान है। पंजाब में शाहपुर कंडी परियोजना से जहां पांच हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने का प्रावधान है, वहीं जम्मू-कश्मीर में 32 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई को लेकर शाहपुर कंडी योजना में प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही पंजाब सरकार 206 मेगावाट बिजली के उत्पादन को लेकर भी इस परियोजना पर काम कर रही है। दोबारा शुरू हुए काम के समय परियोजना की लागत को बढ़ाकर अब 2715 करोड़ कर दिया गया है।
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