कठुआ। खरोट गांव में स्थित एक निजी स्कूल की तरफ से फीस नहीं जमा करने पर बच्चों को स्कूल से निकालने का मामला प्रकाश में आया है। बुधवार को बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जिला सचिवालय में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन की ओर से वसूली जाने वाली फीस की जांच करने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बार-बार प्रबंधन की ओर से बच्चों को परेशान किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों में शामिल सुरिंद्र कुमार और अजीत राज ने बताया कि वे हर माह अपने बच्चों की फीस जमा करवाते हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन कह रहा है कि फीस नहीं जमा की है। अजीत राज ने बताया कि उन्होंने हर महीने फीस जमा करवाई है और इसका उनके पास सबूत भी है, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उनके तीन बच्चों को स्कूल में आने से मना कर दिया है। एक बच्ची जो चौथी कक्षा की छात्रा है उसे तो चौथी कक्षा की परीक्षा ही नहीं देने दी, जिस कारण से उसका पूरा साल बर्बाद हो गया। दो अन्य बच्चों को स्कूल में आने से रोक दिया गया है। ये दोनों बच्चे 10वीं कक्षा में पढ़ते हैं और दो दिन से स्कूल नहीं गए हैं। अजीत राज ने बताया कि तीन बच्चों की बकाया फीस मिलाकर करीब 43 हजार रुपये का बकाया बता दिया है।
इसके साथ ही प्रबंधन की ओर से कहा जाता है कि कम से कम 23 हजार रुपये का बकाया दिया जाए उसके बाद ही बच्चों को स्कूल में आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को न तो कक्षा में बैठने दिया जाता है और न ही उन्हें यूनिट टेस्ट देने दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इतना बकाया है तो प्रबंधन ने पहले क्यों नहीं बताया जब बकाया एक या दो हजार का था। उन्होंने कहा कि प्रबंधन इस बात को भी सप्ष्ट नहीं कर रहा कि आखिर बकाया किस बात का है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार किसी बच्चे के भविष्य के साथ नहीं खेला जा सकता और अगर बच्चों को स्कूल में आने से रोका गया तो अगली बार उग्र रुख अपनाने के लिए मजबूर होंगे। इधर इस मामले में मुख्य शिक्षा अधिकारी बिशन सिंह ने कहा कि उनके संज्ञान में मामला आया है। उन्होंने स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों व बच्चों को सोमवार को कार्यालय में बुलाया है। जो कोई भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल आने से नहीं रोका जा सकता है।