रियासत के चार लाख से ज्यादा सरकारी मुलाजिमों द्वारा हड़ताल पर चले जाने से कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया है। जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर से लेकर लेह तक सरकारी कार्यालयों में हड़ताल का असर नजर आ रहा है।
मुलाजिमों की ज्वाइंट कंस्लटेटिव कमेटी (जेसीसी) द्वारा आहूत दो दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन कार्यालयों में ताले लटके नजर आए और विभागों में काम करवाने पहुंचे लोगों को बैरंग वापस लौटना पड़ा।
मुलाजिम रिटायरमेंट की उम्र 58 से बढ़ाकर 60 करने, डेली वेजर को नियमित करने और पिछले छह माह से वेतन से वंचित रहने वाले तमाम कर्मचारियों का तत्काल वेतन जारी करने की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले मंगलवार को जम्मू में जेडीए, आबकारी एवं बिक्री कर, लोक निर्माण भवन, भेड़ पालन विभाग, पालीटेक्निक, कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, नगर निगम आदि में काम बंद रख मुलाजिमों ने प्रदर्शन किया। कठुआ में भी अपनी मांगों के समर्थन में मुलाजिम हड़ताल पर रहे।
इस दौरान जेसीसी के सदस्यों ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के दफ्तरों में जाकर काम बंद करवाया।
इस दौरान मुलाजिमों को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि जिन मांगों पर जेसीसी और सरकार के बीच समझौता हो चुका है, उन्हें जल्द अमलीजामा पहनाया जाए, नहीं तो मजबूरन आंदोलन तेज करना पड़ेगा।
जेसीसी नेताओं के अनुसार कठुआ, उधमपुर, सांबा, राजोरी, पुंछ, रियासी, डोडा, रामबन, किश्तवाड़ के अलावा कश्मीर और लद्दाख के तमाम जिलों में मुलाजिमों ने कामकाज ठप रखा।
नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे मुलाजिमों पर सरकार बल प्रयोग कर उसे दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं।