जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह
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जम्मू एयरबेस स्टेशन पर पिछले माह हुए ड्रोन हमले में इस्तेमाल इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) को पाकिस्तान की आयुध फैक्ट्री में तैयार किया गया था। घटना की जांच के दौरान इस बात के संकेत मिले हैं। आईईडी पर पाकिस्तान की आयुध फैक्ट्री की मुहर मिली है। यह बात जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह ने मंगलवार को एक न्यूज एजेंसी को दिए गए साक्षात्कार में कही।
डीजीपी का कहना है कि आतंकियों द्वारा 26-27 जून की रात जम्मू एयरबेस पर हमले के लिए ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा करना उपायों के लिए नई चुनौती है।
पाकिस्तान ड्रोन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रहा है। पिछले दिनों देखा गया है कि ड्रोन से हथियार, गोला बारूद ही नहीं, बल्कि पैसा भी फेंका गया। ड्रोन एक नई चुनौती है, लिहाजा इससे निपटने के लिए नए सिरे से सुरक्षा बंदोबस्त करने की जरूरत है। बॉर्डर पर कुछ तकनीकि बंदोबस्त किए गए हैं। उन्होंने बताय कि हमले में जिस आईईडी का इस्तेमाल किया गया उसकी जांच से पता चलता है कि इसे बहुत व्यवस्थति तरीके से पाकिस्तान की आयुध फैक्ट्री में तैयार किया गया था।
विस्फोटक में आरडीएक्स इस्तेमाल किया गया था, जो मार्केट में उपलब्ध नहीं। यह सैन्य इस्तेमाल वाला विस्फोटक पदार्थ था। हमले का तरीका बताता है कि यह आतंकी हमला था और इसमें पाकिस्तान का पूरा हाथ है। डीजीपी ने कहा कि करीब छह से सात किलोग्राम वजनी आईईडी, जिसे भारतीय वायुसेना के अड्डे पर हमले के उसी दिन जम्मू के दूसरे हिस्से से जब्त किया गया था, को भी एक ड्रोन से गिराया गया था। जिसे एक आतंकवादी ने सीमा के पास से एकत्र किया था। उस आतंकी को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था।
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40 से अधिक बार ड्रोन देखे गए
डीजीपी ने बताया कि पिछले कुछ समय में 40 से अधिक बार ड्रोन देखे गए, लेकिन इसमें से 32 को इंटरसेप्ट कर लिया गया। वायुसेना स्टेशन पर हमला करने के लिए ड्रोन पाकिस्तान से आए थे और बॉर्डर यहां से 14 किलोमीटर दूर है।