जम्मू की पुंछ संसदीय सीट पर बृहस्पतिवार को हुए भारी मतदान ने कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन की उधमपुर सीट को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इस सीट से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं और कांग्रेस-एनसी गठबंधन एक बार फिर इस सीट पर जीत दर्ज करने की उम्मीद कर रही होगी।
बंपर वोटिंग से बीजेपी को फायदा?
जम्मू-पुंछ संसदीय सीट पर तीसरे चरण के मतदान के तहत 76.6 फीसदी वोटिंग हुई, जो कि पिछले चुनावों से 20.89 प्रतिशत ज्यादा है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी उमंग नरूला के मुताबिक जम्मू जिले में करीब 70 फीसदी मतदान हुआ जबकि सांबा जिले में करीब 75 फीसदी वोटिंग हुई।
मुस्लिम बहुल इलाके राजौरी और पुंछ जिले के अभी अंतिम आंकड़े नहीं आए हैं। यह माना जा रहा है कि वोटिंग में हुई अचानक वृद्धि का लाभ भाजपा को मिल सकता है और इससे जम्मू क्षेत्र की अन्य क्षेत्र के परिणाम का अंदाजा लगाया जा सकता है।
ज्यादा वोटिंग कांग्रेस के लिए खराब?
राजौरी जिले के नौशेरा क्षेत्र से कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि ज्यादा वोटिंग पार्टी के लिए अच्छे संकेत नहीं है और इसका प्रभाव उधमपुर संसदीय सीट पर होने वाले चुनाव पर पड़ सकता है।
इस सीट पर 17 अप्रैल को वोटिंग होनी है। यहां से आजाद का मुकाबला भाजपा के डॉ जितेंद्र सिंह से हैं, जिन्हें राजनीति में नया माना जा रहा है। लेकिन उनकी साफ छवि उनका मजबूत पक्ष है।
कांग्रेस के मौजूदा सांसद चौधरी लाल सिंह की जगह इस बार कांग्रेस ने यहां से आजाद को उतारा है। जबकि मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीडीपी ने यहां से अरशद मलिक को उतारा है।
बीजेपी को मिलेगा मोदी फैक्टर से फायदा?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी घाटी में प्रचार को छोड़कर आजाद के समर्थन में उधमपुर में दौरा कर रहे हैं। जबकि अनंतनाग सीट से खुद चुनाव लड़ रहीं महबूबा मुफ्ती भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही हैं।
वह अरशद मलिक के समर्थन में डोडा और उधमपुर में चुनावी रैलियां कर रही हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी शुक्रवार को उधमपुर में रैली को संबोधित किया। जबकि दूसरी तरफ भाजपा जम्मू क्षेत्र में नरेंद्र मोदी की दो रैलियों से काफी उत्साहित है।
चुनावी जानकारों का मानना है कि आमतौर पर अधिक मतदान हमेशा सत्तारूढ़ दल के खिलाफ जाता है और इस मामले में मोदी फैक्टर के अलावा एंटी-इनकमबेंसी का फायदा भाजपा को मिल सकता है। हालांकि आजाद ने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान राज्य में काफी काम कराए हैं, जिस वजह से वह मतदाताओं में खासे लोकप्रिय हैं।