राज्य के मंत्रियों को सेना द्वारा फंड जारी करने के खुलासे पर पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
विधान परिषद की विशेषाधिकार हनन समिति ने इस मामले में वीके सिंह को तलब करने का फैसला किया है।
समिति के चेयरमैन एमएलसी जुगल किशोर शर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को तीन घंटे तक चली बैठक में इस पर आमराय बनी। अगले वर्ष नौ जनवरी को जनरल वीके सिंह को समिति के समक्ष पेश होकर उनके खिलाफ विधान परिषद में लंबित विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।
समिति के अध्यक्ष एमएलसी जुगल किशोर शर्मा ने अमर उजाला के साथ बातचीत में इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि पूर्व सेनाध्यक्ष के खिलाफ नेशनल कान्फ्रेंस के तीन एमएलसी ने अक्तूबर 2013 में श्रीनगर विधान परिषद सत्र के दौरान विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किए थे।
यह तीनों एमएलसी विशेषाधिकार हनन समिति के सदस्य भी हैं। इनमें देवेंद्र राणा, अजय सड़ोत्रा और खालिद नजीब सुहरावर्दी शामिल हैं। बैठक में कांग्रेस के एमएलसी रवींद्र कुमार शर्मा, गुलाम नबी मोंगा के अलावा अन्य सदस्य अली मोहम्मद डार और शौकत हुसैन गनई भी मौजूद थे। लिहाजा सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कानूनी प्रक्रिया के तहत ही यह फैसला किया गया है।
विधान परिषद चेयरमैन अमृत मल्होत्रा का कहना है कि उन्होंने वीके सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं लेते हुए मामले को समिति को सौंप दिया था। सदन में अब भी यह प्रस्ताव लंबित है। तीन माह पूर्व पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने जम्मू कश्मीर के राजनेताओं खासकर मंत्रियों को सेना से फंड मिलने का खुलासा किया था।
सितंबर 2013 के आखिरी सप्ताह में वीके सिंह ने यह खुलासा कर सनसनी पैदा कर दी थी। वीके सिंह ने राज्य के कृषि मंत्री गुलाम हसन मीर का नाम भी इस मौके पर लिया था। गौरतलब है कि राज्य विधानसभा में भी जनरल वीके सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्तावों को स्वीकार करते हुए स्पीकर मुबारक गुल ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा था। इसका लिखित में जवाब सीडी के जरिये वीके सिंह ने स्पीकर को भेज दिया था। इस पर अभी स्पीकर ने फैसला नहीं दिया है।