जम्मू-कश्मीर में स्कूली बच्चों के ड्रॉप ऑउट रेट को कम करने के लिए विभाग जागरूकता कार्यक्रम शुरू करेगा। बच्चों को स्कूलों से कैसे जोड़ा जा सके, इसके लिए उन्हें ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) मोड के तहत नेशनल इंस्टीट्यट ऑफ ओपन स्कूल के कार्यक्रमों के बारे में बताया जाएगा।
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डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी (डीएसईएल) ने हाल ही एक बैठक में प्रदेश में ड्रॉप ऑउट रेट पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश शिक्षा विभाग को ऐसे बच्चों को स्कूलों के साथ जोड़ने को कहा है। जम्मू-कश्मीर में विशेष कर कश्मीर संभाग के कई जिलों में ड्रॉप ऑउट रेट काफी अधिक है। जम्मू संभाग में ड्रॉप ऑउट रेट को कम करने के लिए स्कूल शिक्षा निदेशालय ने आओ स्कूल चले जैसा अभियान भी शुरू किया था।
हाल ही में नीति आयोग द्वारा जारी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स इंडेक्स एंड डैशबोर्ड-2020-21 की रिपोर्ट में प्रदेश में सेकेंडरी स्तर पर ड्रापऑउट रेट में 6 फीसदी का सुधार हुआ है, लेकिन प्राइमरी और मीडिल स्तर तक स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या काफी बढ़ी है। प्रदेश सरकार ने स्कूल ड्रॉप ऑउट बच्चों की संख्या जानने के लिए अंतिम सर्वे 2016 में किया था, जिसमें स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या 27 हजार थी, लेकिन अब यह संख्या 50 हजार से अधिक हो गई है।
स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी (डीएलईएल) ने भी इसको लेकर काफी चिंता व्यक्त की थी। इसको देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है। स्कूलों में ड्रॉप ऑउट रेट को कम करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग जागरूकता कार्यक्रम शुरू करेगा।