जेलों में लगातार कैदियों और आतंकियों के पास मिलने वाले मोबाइल फोन के मामलों ने जेल विभाग की परेशानी बढ़ा दी है। लिहाजा अब इसका तोड़ निकालने की कवायद शुरू कर दी गई है। जेल विभाग जेलों में 4जी मोबाइल नेटवर्क की फ्रिक्वेंसी कम करने की तैयारी कर रहा है। इस दिशा में कदम उठाते हुए जेल विभाग ने मोबाइल कंपनियों से सिफारिश की है कि जेलों में फ्रिक्वेंसी कम करें।
कोट भलवाल जेल के अधीक्षक का कहना है कि जियो समेत अन्य मोबाइल कंपनियों से सिफारिश की गई है जेल के भीतर फ्रिक्वेंसी कम की जाए। बता दें कि इस जेल में तीन बार कैदियों से मोबाइल फोन मिले हैं। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि जेलों में सुरक्षा में चूक हो रही है। इसके चलते ऐसा हो रहा है।
जानकारी के अनुसार जेलों में 4जी नेटवर्क को जाम करने वाला जैमर सिस्टम नहीं लगा हुआ है। इसका कैदी जमकर फायदा उठा रहे हैं। आतंकी और गैंगस्टर मिलकर जेल कर्मियों की मिलीभगत से अपना नेटवर्क जेल में रह कर ही चला रहे हैं। इसमें उनकी मदद मोबाइल फोन कर रहे हैं। दरअसल, प्रदेश की किसी जेल में जैमर नहीं लगा हुआ।
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इसकी वजह से 4जी सिमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कोट भलवाल जेल के अधीक्षक का कहना है कि जब तक जैमर को अपग्रेड करने का काम शुरू नहीं होता। तब तक मोबाइल कंपनियों से सिफारिश की गई है कि वह 4जी नेटवर्क की फ्रिक्वेंसी को कम कर दें। ताकि इसका कोई इस्तेमाल न कर सके। क्योंकि मौजूदा जैमर 2जी पर नियंत्रित पा लेते हैं। यदि जेलों में 4जी नेटवर्क नहीं चलेगा तो इसका इस्तेमाल नहीं हो पाएगा।