इस बार लॉकडाउन में श्रमिकों की ज्यादा कमी महसूस नहीं हुई। उत्पादन में जरूर कमी आई थी। औद्योगिक गतिविधियाें से जुड़ी समस्याओं को प्रशासन से उठाया गया, जिन्हें फौरन सुलझा लिया गया। बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से जो भी कमी को पूरा करने के लिए गुहार लगाई गई, उन्होंने उसको समय पर पूरा किया, जिसके चलते इस लॉकडाउन में परिस्थितियां काफी अच्छी रहीं। -सुशील रोहिल्ला, जनरल मैनेजर, एचआर पेप्सी
लॉकडाउन में कोरोना के प्रोटोकॉल के तहत काम करना पड़ता था। इसके कारण 50 फीसदी श्रमिकों के साथ ही यूनिट को चलाया गया। श्रमिकों की कमी भी खल रही थी, लेकिन जैसे ही अनलॉक हुआ श्रमिकों की वापसी हुई है। यूनिट 100 श्रमिकों के साथ 24 घंटे चल रहा है। -अनिल कुमार, सीनियर एचआर, गोदरेज कंपनी
इस बार श्रमिकों की कमी तो नहीं महसूस हुई, लेकिन स्कूल कॉलेज बंद होने के कारण उत्पादन में कमी आई है। स्थानीय मांग खत्म हो गई है। इस समय मांग में बढ़ोतरी हुई है। अनलॉक होने के कारण एक तो श्रमिकों की कमी भी महसूस नहीं हुई और दूसरा उत्पाद विदेशों में भेजा जा रहा है, जिसके चलते अनलॉक के बाद स्थिति सामान्य हो गई है। -सर्वेंद्र पांडे, एचआर हेड, डोम्स कंपनी
लॉकडाउन में हमारे पास श्रमिकों की संख्या 100 के करीब रह गई थी, लेकिन अनलॉक होने पर संख्या बढ़कर 200 हो गई है। फैक्ट्रियों को श्रमिकों की मांग भी पूरी की जा रही है। श्रमिकों को लॉकडाउन में डोर टू डोर बस सेवा दी गई थी, लेकिन अनलॉक के बाद काफी सारी चीजों में सुधार आया है। -चिंकल थापा, ठेकेदार
लॉकडाउन में उत्पादन में काफी आई थी, जिसके चलते बहुत काम प्रभावित हो गया था, लेकिन अनलॉक के बाद स्थिति नियंत्रित हो गई है। मांग भी आ रही है। -शम्मी शर्मा, सीनियर एचआर, सुधीर फैक्ट्री