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जम्मू-कश्मीर: कोरोना कर्फ्यू की पाबंदियां हटने से पटरी पर लौटने लगे उद्योग

Thu, 01 Jul 2021 07:41 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

अनलॉक शुरू होने और कर्फ्यू की पाबंदियां हटने के बाद से औद्योगिक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है।
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coronavirus in jammu kashmir - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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कोरोना की दूसरी लहर से प्रभावित चल रहीं औद्योगिक गतिविधियां अब अपनी सामान्य रफ्तार से चल पड़ी हैं। उत्पादन के लिए श्रमिकों की किल्लत दूर हो गई है। तैयार माल की मांग भी बढ़ गई है, जिससे बाड़ी ब्राह्मणा में चल रहीं छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां पूरी क्षमता से काम करने लगी हैं। पिछले कुछ समय से उद्यमियों को 50 फीसदी श्रमिकों के साथ काम करना पड़ रहा था। कहीं उद्यमियों को पूरी तरह से श्रमिक भी नहीं मिल पा रहे थे। केवल जरूरी वस्तुएं तैयार करने वाले कारखाने ही ठीक से चल रहे थे।

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इसके असर से गैर जरूरी श्रेणी वाली वस्तुओं के उत्पादन में भाी गिरावट आ गई थी। अनलॉक शुरू होने और कर्फ्यू की पाबंदियां हटने के बाद से औद्योगिक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। पहले श्रमिकों को लखनपुर में टेस्ट निगेटिव होने पर भी क्वारंटीन किया जा रहा था, लेकिन अब निगेटिव रिपोर्ट वाले श्रमिक दूसरे ही दिन काम पर लौट रहे हैं। इससे कुशल श्रमिकों की उपलब्धता और दूसरे राज्यों से उत्पादों की मांग बढ़ने से उद्योग अपनी पटरी पर लौट आए हैं।  

सरकार और प्रशासन की तरफ से इस बार पुख्ता तैयारियां की गई थीं। पहले लॉकडाउन में लोग जम्मू-कश्मीर का रुख करने पर डरते थे, लेकिन इस बार श्रमिक पूरी तरह से काम करने के लिए आश्वस्त थे। लॉकडाउन खुलने के बाद शत प्रतिशत यूनिट काम कर रही हैं। -ललित महाजन, प्रधान, बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
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इस बार लॉकडाउन में श्रमिकों की ज्यादा कमी महसूस नहीं हुई। उत्पादन में जरूर कमी आई थी। औद्योगिक गतिविधियाें से जुड़ी समस्याओं को प्रशासन से उठाया गया, जिन्हें फौरन सुलझा लिया गया। बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से जो भी कमी को पूरा करने के लिए गुहार लगाई गई, उन्होंने उसको समय पर पूरा किया, जिसके चलते इस लॉकडाउन में परिस्थितियां काफी अच्छी रहीं। -सुशील रोहिल्ला, जनरल मैनेजर, एचआर पेप्सी

लॉकडाउन में कोरोना के प्रोटोकॉल के तहत काम करना पड़ता था। इसके कारण 50 फीसदी श्रमिकों के साथ ही यूनिट को चलाया गया। श्रमिकों की कमी भी खल रही थी, लेकिन जैसे ही अनलॉक हुआ श्रमिकों की वापसी हुई है। यूनिट 100 श्रमिकों के साथ 24 घंटे चल रहा है। -अनिल कुमार, सीनियर एचआर, गोदरेज कंपनी

इस बार श्रमिकों की कमी तो नहीं महसूस हुई, लेकिन स्कूल कॉलेज बंद होने के कारण उत्पादन में कमी आई है। स्थानीय मांग खत्म हो गई है। इस समय मांग में बढ़ोतरी हुई है। अनलॉक होने के कारण एक तो श्रमिकों की कमी भी महसूस नहीं हुई और दूसरा उत्पाद विदेशों में भेजा जा रहा है, जिसके चलते अनलॉक के बाद स्थिति सामान्य हो गई है। -सर्वेंद्र पांडे, एचआर हेड, डोम्स कंपनी

लॉकडाउन में हमारे पास श्रमिकों की संख्या 100 के करीब रह गई थी, लेकिन अनलॉक होने पर संख्या बढ़कर 200 हो गई है। फैक्ट्रियों को श्रमिकों की मांग भी पूरी की जा रही है। श्रमिकों को लॉकडाउन में डोर टू डोर बस सेवा दी गई थी, लेकिन अनलॉक के बाद काफी सारी चीजों में सुधार आया है। -चिंकल थापा, ठेकेदार

लॉकडाउन में उत्पादन में काफी आई थी, जिसके चलते बहुत काम प्रभावित हो गया था, लेकिन अनलॉक के बाद स्थिति नियंत्रित हो गई है। मांग भी आ रही है। -शम्मी शर्मा, सीनियर एचआर, सुधीर फैक्ट्री

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