श्रीनगर के रैनावाड़ी इलाके के रहने वाले बशीर अहमद बाबा (44) के साथ कुछ ऐसा हुआ जो हैरान कर देने वाला है। उसे बिना किसी जुर्म के 11 साल तक आतंकी के ठप्पे के साथ गुजरात की जेल में रहना पड़ा। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब बेगुनाह साबित हुआ तो घर लौटा। बशीर को इस बात का अफसोस है कि वह पिता की मृत्यु से पहले आखिरी बार उनका चेहरा नहीं देख पाया।
इग्नू से उर्दू में परा स्नातक करने के बाद बशीर श्रीनगर में एक माया फाउंडेशन स्वयंसेवी संस्था के साथ काम करता था। कंप्यूटर भी चला लेता था। इसलिए उच्च ट्रेनिंग के लिए फाउंडेशन ने बशीर को 2010 में गुजरात भेजने का फैसला किया। नजीर अहमद ने बताया कि उनका भाई माया फाउंडेशन के किमाया क्लेफ्ट सेंटर के लिए कैंप कोर्डिनेटर का काम कर रहा था। क्लेफ्ट लिप के साथ जन्मे बच्चों को ढूंढ़ने और उनके उपचार का काम यह एनजीओ करता था।
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