रियासत में नई सरकार के गठन को लेकर भाजपा-पीडीपी के बीच वार्ता नाकाम हो गई है। वीरवार देर शाम नई दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की मुलाकात और इसके बाद शुक्रवार को राम माधव की पीडीपी के नेताओं से मुलाकात में दोनों ही दल अपने-अपने स्टैंड पर कायम रहे।
पीडीपी नेताओं से बैठक के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि सरकार बनने से पहले पीडीपी की ओर से रखी जा रहीं नई शर्तें नहीं मानी जा सकतीं। श्रीनगर में पीडीपी के उच्च पदस्थ सूत्रों की ओर से भी भाजपा के साथ वार्ता बेनतीजा होने की बात कही गई है।
हालांकि, पीडीपी की ओर से एजेंडा आफ एलायंस के बाहर कोई भी नई शर्त रखने के राम माधव के दावे को भी खारिज किया गया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात में एवं इससे पहले भी सिर्फ एजेंडा आफ एलायंस पर समयबद्ध अमल की बात की थी। महबूबा की पीएम नरेंद्र मोदी से भी मिलने की बात थी, लेकिन, फिलहाल यह टलता दिख रहा है।
शुक्रवार को राम माधव ने पत्रकारों से कहा कि वार्ता में प्रगति नहीं हुई है। भाजपा के स्टैंड में कोई बदलाव नहीं है। पार्टी उस एजेंडे पर कायम है, जो मुफ्ती मोहम्मद सईद के समय तय किया गया था। सिर्फ इतना बदलाव हुआ है कि मुफ्ती मोहम्मद अब हमारे बीच नहीं हैं।
अब मुद्दा पीडीपी पर निर्भर है। पीडीपी अपना नेता चुने और बात आगे बढ़ाए। जो भी नई उम्मीदें हैं, उनकी पूर्ति के लिए सरकार गठन के बाद बातचीत की जा सकती है। शर्तों के आधार पर सरकार का गठन संभव नहीं है।
पीडीपी वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए भाजपा से मोलतोल की नीति पर कायम
पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
सूत्रों के मुताबिक पीडीपी अपने वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए भाजपा से मोलतोल की नीति पर अब तक कायम है। इसके तहत नई शर्तों में डुलहस्ती और उड़ी बिजली प्रोजेक्टों की एनएचपीसी से वापसी तथा सेना के कब्जे से भवनों और जमीन को खाली करने का मुद्दा शामिल किया गया है। पीडीपी अफस्पा की आंशिक वापसी के लिए भी ठोस आश्वासन चाहती है।
भाजपा ने इन शर्तों को खारिज कर दिया है। राम माधव ने स्पष्ट कर दिया है कि नया जो भी होगा वह सरकार बनने के बाद ही संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद इन मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। राज्य सरकार को केंद्र के समक्ष मांग रखने का अधिकार है। सरकार के गठन पर राम माधव ने कहा कि अभी कुछ कहा नहीं जा सकता, गतिरोध कायम है।
इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को साफ कर दिया था कि पहले सरकार का गठन हो और बाद में एक-एक मुद्दे पर समन्वय समिति की बैठकों में चर्चा की जाए। उधर, पीडीपी अध्यक्ष महबूबा कुछ शर्तों पर अड़ी रहीं। पीडीपी के सख्त रुख में बदलाव नहीं आता देख भाजपा ने भी तेवर कड़े कर लिए हैं। मुफ्ती मोहम्मद के निधन के बाद जम्मू-कश्मीर में 8 जनवरी से राज्यपाल शासन लागू है।
महबूबा-शाह के बीच मुलाकात की ‘गोपनीयता’ पर उमर ने उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य में सरकार गठन को लेकर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच हुई मुलाकात की ‘गोपनीयता’ पर सवाल उठाए हैं।
उमर ने ट्विटर पर लिखा है, ‘इस बार गोपनीयता क्यों बरती गई? पिछली मुलाकात में फूल और शॉल की अदला-बदली की गई थी।’ उमर ने ट्वीट कर राज्यपाल पर भी निशाना साधा है। सेना के इस्तेमाल वाली जमीन खाली कराने की घोषणा पर उमर ने कहा कि राज्यपाल एनएन वोहरा ने ‘राजनीतिक फैसलों को प्रशासनिक कार्य में बदल दिया है।’