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कठुआ: थाईलैंड में भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम की शानदार जीत, पाकिस्तान के पांच विकेट उड़ाकर गुरमेंद्र बने स्टार

सार

कठुआ के युवा तेज गेंदबाज गुरमेंद्र ने थाईलैंड में इंडो-थाई ओपन क्रिकेट चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो मैचों में नौ विकेट झटके। पाकिस्तान के खिलाफ पांच और थाईलैंड के खिलाफ चार विकेट लेने वाले गुरमेंद्र को टूर्नामेंट में बेस्ट बॉलर के सम्मान से नवाजा गया।
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गेंदबाज गुरमेंद्र ट्रॉफी लेते - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कठुआ की माटी के एक और होनहार ने अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर जिले का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। थाईलैंड में संपन्न हुई इंडो-थाई ओपन क्रिकेट चैंपियनशिप 2026 में कठुआ के युवा तेज गेंदबाज गुरमेंद्र ने अपनी गेंदबाजी से खूब नाम कमाया है। यूथ एंड स्पोर्ट्स प्रमोशन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के बैनर तले भारतीय अंडर-19 टीम में शामिल हुए गुरमेंद्र ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए बेस्ट बॉलर ऑफ द मैच का खिताब अपने नाम किया।

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विजेता - फोटो : सोशल मीडिया
प्रतियोगिता के पहले ही मुकाबले में गुरमेंद्र ने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ अपनी धारदार गेंदबाजी का जलवा बिखेरा। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 200 रन बनाए, जिसमें गुरमेंद्र ने अपने 4 ओवर के स्पेल में पाकिस्तान के पांच शीर्ष बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर उनकी कमर तोड़ दी। भारत ने इस लक्ष्य को 18 ओवर में 201 रन बनाकर आसानी से हासिल कर लिया, जिसमें गुरमेंद्र के पांच विकेट जीत की सबसे बड़ी बुनियाद बने। कठुआ के इस युवा गेंदबाज का फॉर्म अगले मैच में भी बरकरार रहा।

मेजबान थाईलैंड के खिलाफ मुकाबले में गुरमेंद्र ने कसी हुई लाइन-लेंथ के साथ गेंदबाजी करते हुए चार ओवरों में चार महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। उनके इस स्पेल के चलते थाईलैंड की पूरी टीम मात्र 111 रनों पर ढेर हो गई और भारत ने 16 ओवर में 112 रन बनाकर मुकाबला एकतरफा जीत लिया। दोनों मैचों में कुल नौ विकेट चटकाने वाले गुरमेंद्र को उनकी इस जादुई गेंदबाजी के लिए टूर्नामेंट में बेस्ट बॉलर के विशेष सम्मान से नवाजा गया।
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गेंदबाज गुरमेंद्र - फोटो : सोशल मीडिया
कठुआ से अंतरराष्ट्रीय पिच तक का सफर
विदेश की धरती पर तिरंगा फहराने के बाद कठुआ लौटे गुरमेंद्र ने कहा कि पाकिस्तान और थाईलैंड जैसी टीमों के सामने गेंदबाजी करना उनके करियर का सबसे यादगार अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि नई परिस्थितियों और विदेशी पिचों पर खेलने से उन्हें खेल की कई बारीकियां सीखने को मिलीं। उन्होंने कहा कि मेरा दिन सुबह 4 बजे शुरू होता है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे क्रिकेट अकादमी पहुंचता हूं और घंटों गेंदबाजी का अभ्यास करता हूं।

मौसम चाहे मूसलाधार बारिश का हो, कड़ाके की ठंड का या चिलचिलाती धूप का अगर क्रिकेट में मुकाम पाना है, तो अभ्यास में निरंतरता और अनुशासन ही सबसे बड़ा मंत्र है। कठुआ की तंग गलियों और स्थानीय मैदानों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके गुरमेंद्र की इस कामयाबी ने साबित कर दिया है कि जिले की युवा प्रतिभाएं किसी भी बड़े मंच पर लोहा मनवाने का माद्दा रखती हैं। स्थानीय खेल प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने गुरमेंद्र को कठुआ का गौरव बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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