प्रतियोगिता के पहले ही मुकाबले में गुरमेंद्र ने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ अपनी धारदार गेंदबाजी का जलवा बिखेरा। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 200 रन बनाए, जिसमें गुरमेंद्र ने अपने 4 ओवर के स्पेल में पाकिस्तान के पांच शीर्ष बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर उनकी कमर तोड़ दी। भारत ने इस लक्ष्य को 18 ओवर में 201 रन बनाकर आसानी से हासिल कर लिया, जिसमें गुरमेंद्र के पांच विकेट जीत की सबसे बड़ी बुनियाद बने। कठुआ के इस युवा गेंदबाज का फॉर्म अगले मैच में भी बरकरार रहा।
मेजबान थाईलैंड के खिलाफ मुकाबले में गुरमेंद्र ने कसी हुई लाइन-लेंथ के साथ गेंदबाजी करते हुए चार ओवरों में चार महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। उनके इस स्पेल के चलते थाईलैंड की पूरी टीम मात्र 111 रनों पर ढेर हो गई और भारत ने 16 ओवर में 112 रन बनाकर मुकाबला एकतरफा जीत लिया। दोनों मैचों में कुल नौ विकेट चटकाने वाले गुरमेंद्र को उनकी इस जादुई गेंदबाजी के लिए टूर्नामेंट में बेस्ट बॉलर के विशेष सम्मान से नवाजा गया।
कठुआ से अंतरराष्ट्रीय पिच तक का सफर
विदेश की धरती पर तिरंगा फहराने के बाद कठुआ लौटे गुरमेंद्र ने कहा कि पाकिस्तान और थाईलैंड जैसी टीमों के सामने गेंदबाजी करना उनके करियर का सबसे यादगार अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि नई परिस्थितियों और विदेशी पिचों पर खेलने से उन्हें खेल की कई बारीकियां सीखने को मिलीं। उन्होंने कहा कि मेरा दिन सुबह 4 बजे शुरू होता है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे क्रिकेट अकादमी पहुंचता हूं और घंटों गेंदबाजी का अभ्यास करता हूं।
मौसम चाहे मूसलाधार बारिश का हो, कड़ाके की ठंड का या चिलचिलाती धूप का अगर क्रिकेट में मुकाम पाना है, तो अभ्यास में निरंतरता और अनुशासन ही सबसे बड़ा मंत्र है। कठुआ की तंग गलियों और स्थानीय मैदानों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके गुरमेंद्र की इस कामयाबी ने साबित कर दिया है कि जिले की युवा प्रतिभाएं किसी भी बड़े मंच पर लोहा मनवाने का माद्दा रखती हैं। स्थानीय खेल प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने गुरमेंद्र को कठुआ का गौरव बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।