पिछले आठ दिनों से पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बंदी बनाकर रखे गए 27 भारतीय ड्राइवरों में से 15 बीमार हो गए हैं। पर्याप्त चिकित्सा सुविधा न मिलने और लाइन आफ कंट्रोल (एलओसी) पर लगातार बर्फबारी के कारण उनकी हालत बिगड़ती जा रही है।
इतना ही नहीं, पीओके अथारिटी द्वारा अपने 48 ड्राइवरों (तस्कर ड्राइवर के बिना) को वापस लेने से इंकार करने के बाद उड़ी सेक्टर स्थित ट्रेड सेंटर में पीओके ड्राइवरों की पूरी मेहमाननवाजी हो रही है, लेकिन उसके विपरीत भारतीय ड्राइवरों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही।
इंट्रा एलओसी ट्रेडर्स एसोसिएशन उड़ी के प्रेसीडेंट तारिक खान के अनुसार उन्होंने सुबह पीओके में फंसे ड्राइवरों के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि 15 ड्राइवर इस वक्त बीमार हैं। ट्रेड सेंटर में डाक्टर तक की व्यवस्था नहीं की गई है।
जबकि इस ओर रुके 48 ड्राइवरों के रहने और खाने की तमाम व्यवस्था की गई है। बर्फबारी को देखते हुए ट्रेड सेंटर में ठंड से बचाव के भी इंतजाम किए गए हैं। लेकिन हमारे ड्राइवरों के प्रति लापरवाही बरती जा रही है।
प्रेसीडेंट तारिक खान के अनुसार ड्राइवरों की दुर्गति की सूचना मिलने के बाद उन्होंने ज्वाइंट चैंबर आफ एलओसी ट्रेडर्स (पीओके) के प्रेसीडेंट मुजीम शाह के साथ उनकी बातचीत हुई है। वे इस समय मलेशिया के दौरे पर हैं। उन्होंने मुजीम शाह को बताया कि भारतीय ड्राइवरों के लिए उचित व्यवस्था न होने के कारण वे बीमार पडे हुए हैं।
शाह ने आश्वासन दिया है कि वे ज्वाइंट चैंबर के अन्य पदाधिकारियों की मार्फत ड्राइवरों के लिए डाक्टर उपलब्ध करवाने के साथ रहने के उचित इंतजाम करवाते हैं। उल्लेखनीय है कि 17 जनवरी को पीओके के एक ट्रक ड्राइवर को ब्राउन शुगर के साथ पकड़ा गया था।
उस दिन पीओके से माल लेकर 49 ट्रक पहुंचे थे। जब अन्य 48 ड्राइवर ट्रक लेकर वापस लौटने लगे तो पीओके अथारिटी ने पकड़े गए ड्राइवर के बिना उन्हें न सिर्फ वापस लेने से इंकार कर दिया, बल्कि उस पार गए 27 भारतीय ड्राइवरों को भी वापस नहीं छोड़ा।
हालांकि एक दिन पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने पीओके अथारिटी को कड़ा जवाब दिया है और शुक्रवार को दिनभर इस विवाद का हल निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन देर शाम तक कोई फैसला नहीं हो पाया था।
प्रेसीडेंट तारिक के अनुसार गृह मंत्रालय के अफसरों का सिर्फ इतना कहना था कि वे प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। आठ दिन से मामला लटका होने के कारण इससे जुड़े 76 ड्राइवरों के परिवार वाले परेशान हैं। कश्मीर के ड्राइवरों के परिवार वाले लगातार उनके संपर्क में हैं, लेकिन वे उन्हें कोई जवाब नहीं दे पा रहे।