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J&K सरकार के अच्छे कदम से भी हो गया करोड़ों का नुकसान

Wed, 20 Apr 2016 01:45 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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- फोटो : concept photo
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सरकारी स्कूलों के विलय के बाद सैकड़ों इमारतें करीब एक वर्ष से बेकार पड़ी हैं। शिक्षा विभाग ने इन इमारतों के इस्तेमाल को लेकर योजनाएं तैयार करने की कोशिश बहुत कीं, लेकिन बात नहीं बनीं। वहीं इस्तेमाल नहीं किए जाने के कारण इमारतों की हालत दिन-प्रति-दिन खस्ता होती जा रही हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि इसको लेकर जल्द कोई कदम उठाए जाएंगे।
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2015 में भाजपा-पीडीपी ने सरकार बनाते ही शिक्षा विभाग में अहम निर्णय लिए थे। इनमें से एक 20 से कम विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों को दूसरे स्कूल में विलय करने का निर्णय लिया था। सरकार के इस निर्णय से पूरे जम्मू संभाग में 2000 से ज्यादा स्कूलों का विलय दूसरे स्कूलों में हुआ था। 

जम्मू जिले में सबसे ज्यादा 310 स्कूलों का विलय दूसरे सरकारी स्कूलों में किया गया था। विलय के बाद स्कूलों की इमारतें खाली हो गई थीं। इन इमारतों में साक्षर भारत मिशन की कक्षाएं चलाने को लेकर शिक्षा विभाग ने विचार शुरू किया था, तो वहीं शिक्षा मंत्री ने बेरोजगार युवाओं के कोचिंग सेंटर चलाने के लिए योजना तैयार करना शुरू की थीं, लेकिन एक वर्ष से इसको लेकर केवल चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन बन कुछ नहीं पाया है। 
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इमारतें एक वर्ष से बेकार पड़ी हैं। कुछ इमारतों की हालत खराब होने लगी है, जिसको लेकर अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी हैं। चीफ एजूकेशन आफिसर जेके सूदन ने बताया कि इन इमारतों के इस्तेमाल को लेकर शिक्षा विभाग गंभीरता के साथ विचार कर रहा है। जल्द इन इमारतों को किसी न किसी तरह से शिक्षा विभाग इस्तेमाल करेगा।
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