जम्मू कश्मीर के राजोरी में चौदह साल की स्कूली छात्रा को जबरन अगवा कर एक सूमो चालक और उसके दो दोस्तों ने दिनभर अपने कब्जे में रख गैंगरेप का शिकार बनाने के बाद अधमरी हालत में अस्पताल के सामने फेंक दिया।
राजोरी और जम्मू के कई सरकारी अस्पतालों के बीच पेंडुलम की तरह झुलाने के बाद अब उक्त छात्रा का इलाज एसएमजीएस अस्पताल में हो रहा है। काफी मात्रा में खून बह जाने के कारण उसकी हालत बेहद चिंताजनक बनी है।
दिल दहला देने वाली यह वारदात राजोरी में हुई। पीड़ित छात्रा, उसके पिता और अन्य घरवालों ने अमर उजाला टीम और पुलिस को जो जानकारी दी उसके मुताबिक पीड़िता मंगलवार की सुबह जियारत करने के लिए शाहदरा शरीफ जाने को घर से निकली थी।
शाहदरा जाने के लिए वह शहर के टैंपो स्टैंड से एक सूमो में बैठी। लेकिन सूमो चालक उसे शाहदरा ले जाने के बजाय राजोरी-दरहाल की तरफ ले जाने लगा। किशोरी ने चालक को टोका, चालक ने उसकी एक नहीं सुनी।
कुछ दूर जाने के बाद सूमो चालक ने उसके साथ गाड़ी में जबरन दुष्कर्म किया। कुछ देर बाद वाहन चालक के दो दोस्त भी वहां पहुंच गए। इसके बाद तीनों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
रात होते-होते किशोरी की हालत बिगड़ने लगी तो आरोपी उसे अधमरी हालत में अस्पताल के बाहर छोड़कर भाग गये। कुछ लोगों ने उसे अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचाया, जहां आरंभिक इलाज करने के बाद डाक्टरों ने उसे जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया।
जहां तीन सरकारी अस्पतालों में चक्कर काटने के बाद उसे एसएमजीएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया। पुलिस ने इस संबंध में तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
राजोरी जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. अरुण शर्मा ने बताया कि मंगलवार की रात करीब नौ बजे उक्त किशोरी गंभीर हालत में लाई गई। जांच के दौरान पाया गया कि उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ है।
उन्होंने इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस और उसके घर वालों को दी। पीड़िता का कहना है कि आरोपियों के सामने आने पर वह उसे पहचान सकती है।
तीन घंटे तक चक्कर कटवाते रहे सरकारी अस्पताल
गैंगरेप की पीड़िता के इलाज के प्रति सरकारी अस्पतालों का रवैया हैरान करने वाला था। राजोरी में हालत बिगड़ने के बाद जम्मू पहुंची किशोरी को तीन घंटे तक एक से दूसरे अस्पताल के चक्कर कटवाए जाते रहे।
कोई भी अस्पताल उसके इलाज में दिलचस्पी नहीं ले रहा था। इसीलिए उसे पहले राजोरी से जीएमसी लाया गया। वहां एंबुलेंस से उतारे बिना ही एसएमजीएस भेज दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल का मामला होने के कारण उसे वहां से विभाग के सरवाल अस्पताल में रेफर कर दिया गया।
सरवाल अस्पताल ने हाथ खड़े किए तो वापस एसएमजीएस लाया गया।
अमर उजाला ने जब आला अफसरों से पूछताछ की तब कहीं एसएमजीएस अस्पताल में पीड़ित का इलाज शुरू किया गया। पीड़िता के शरीर में खून की भारी कमी हो गई थी। देर शाम तक तीमारदार खून का इंतजाम करने में जुटे थे।
अस्पताल के अधीक्षक डा. दारा सिंह का कहना है कि पीड़िता के पहुंचने पर उसे उचित इलाज दिया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन भी खुद खून का इंतजाम कर रहा है। उसे लेबर रूम में इलाज दिया जा रहा है।