मौजूदा आरक्षण नियमों के अनुसार, सीधी भर्तियों में आरक्षण का प्रतिशत अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 8 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 10 प्रतिशत, कमजोर और विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों (सामाजिक जाति) के लिए 2 प्रतिशत, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एएलसी) / अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से सटे क्षेत्रों के निवासियों को 3 प्रतिशत, पिछड़े क्षेत्रों (आरबीए) के निवासियों के लिए 20 प्रतिशत है। एक्स-सर्विसमैन के लिए 6 प्रतिशत और शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों (पीएचसी) के लिए 3 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण भी उपलब्ध है।
सीधी भर्ती में यह होगा आरक्षण
प्रशासनिक परिषद ने विचार के बाद नौकरियों में सीधी भर्ती में आरक्षण के प्रतिशत को भी तर्कसंगत बनाने का फैसला किया है। सीधी भर्ती में अब एससी को 8 प्रतिशत, एसटी को 10 प्रतिशत, सामाजिक जाति को 4 प्रतिशत, एएलसी / आईबी के निवासियों को 4 प्रतिशत, आरबीए को 10 प्रतिशत, पीएसपी को 4 प्रतिशत
प्रोफेशनल कोर्सेज में इस आधार पर मिलेगा आरक्षण
मेडिकल, इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर और इसी तरह के अन्य पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में पीजी स्तर पर प्रोफेशनल संस्थानों, व्यावसायिक संस्थानों में दाखिले और सीटों के वितरण का भी नए सिरे से निर्धारण किया गया है। इसके तहत अब एससी को 8 प्रतिशत, एसटी को 10 प्रतिशत, सामाजिक जाति को 4 प्रतिशत, एएलसी को 4 प्रतिशत, आरबीए को 10 प्रतिशत, पीएसपी को 4 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत होगा। 4 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण पीएचसी को उपलब्ध होगा। एमडी-एमएस, एम टेक, इंजीनियरिंग और कृषि विज्ञान और इसी तरह के अन्य स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए अनुसूचित जाति को 8 प्रतिशत, एसटी को 10 प्रतिशत, आरबीए को 10 प्रतिशत, एएलसी-आईबी को 4 प्रतिशत, सामाजिक जाति के लिए 4 प्रतिशत, पीएसपी को 4 प्रतिशत, रक्षा कार्मिक-अर्ध-सैन्य बलों के बच्चों को 2 प्रतिशत और जम्मू-कश्मीर पुलिस कार्मिक, खेल में उत्कृष्ट दक्षता रखने वाले उम्मीदवारों को एक प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।
वैध पहचान प्रमाणपत्र होना चाहिए
पीएसपी श्रेणी के लाभ का दावा करने के लिए एक व्यक्ति को पहाड़ी कबीले, समुदाय या जनजाति का सदस्य होना चाहिए, जिसकी विशिष्ट सांस्कृतिक, जातीय और भाषाई पहचान हो। पहाड़ी भाषा बोलनी चाहिए और उसकी मातृभाषा पहाड़ी होनी चाहिए। उसके पास एक वैध पहचान प्रमाण होना चाहिए जो आधार कार्ड या डोमिसाइल प्रमाणपत्र हो सकता है। पीएसपी से संबंधित व्यक्तियों के दावे को प्रमाणित करने के लिए तहसीलदार सक्षम प्राधिकारी होंगे।
एसटी का मिले दर्जा
पहाड़ी भाषा बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष तथा भाजपा नेता कुलदीप राज गुप्ता ने कहा है कि पहाड़ी भाषी लोगों को आरक्षण देकर सरकार ने अच्छा कदम उठाया है, लेकिन इन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बोर्ड के उपाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने इस दिशा में कई बार प्रयास किए थे, लेकिन यह परवान न चढ़ सका। इसके साथ ही वाजपेयी शासनकाल में राजोरी में स्थापित दूरदर्शन रिले केंद्र को शुरू किया जाना चाहिए।