कश्मीर संभाग के सीमांत क्षेत्र मच्छेल में 30 अप्रैल 2010 को हुई मुठभेड़ फर्जी साबित हो गई है। इस मामले में सेना की ओर से एक कर्नल सहित दो अफसरों और चार जवानों के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्यवाही शुरू करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। उत्तरी कमान के सैन्य प्रवक्ता ने इस आदेश की पुष्टि की है।
सेना की ओर से जारी आदेश के मुताबिक कर्नल डीके पठानिया और मेजर उपेंद्र के अलावा चार जवानों पर कार्यवाही का शिकंजा कसा है।
सेना की ओर से 30 अप्रैल 2010 में एक मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकियों को मार गिराने का दावा किया गया था। तीन कथित आतंकियों की हत्या के बाद कश्मीर में हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान हिंसक प्रदर्शनों में 123 लोग मारे गए थे।
लोगों का दावा था कि मारे सेना द्वारा मार गिराए गए तीनों युवक बारामुला जिले के नादियाल के रहने वाले हैं और आतंकी नहीं है। मुठभेड़ में मारे गए युवकों की पहचान मोहम्मद शफी, शहजाद अहमद और रियाज अहमद की गई थी। मृतकों के रिश्तेदारों का आरोप था कि तीनों युवकों को सेना ने एलओसी के निकट ले जाकर मार गिराया था।
इस मामले में मृतकों के रिश्तेदारों की शिकायत पर पुलिस की ओर से जांच के दौरान टेरीटोरियल आर्मी के एक जवान और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस द्वारा इस मामले में सेना के कुछ अन्य जवानों से भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी।
इसके बाद सेना द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन देने पर जांच सेना को सौंप दी गई थी। सेना द्वारा स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मदद से इस मामले में की गई विस्तृत जांच के बाद बुधवार को सेना के दो अधिकारियों और चार जवानों के कोर्ट मार्शल की कार्यवाही शुरू करने के आदेश जारी कर दिए।