अब माइक इल्तिजा के हाथ आता है। वह कश्मीरी में भाषण शुरु करती हैं। बमुश्किल 4-5 शब्दों के बाद उर्दू-हिंदी बोलने लगती हैं। कहती हैं, मैं आप लोगों के लिए काम करना चाहती हूं। दूसरी जमात (पार्टी) वाले टाइम पास के लिए आए हैं। उन्होंने आपके लिए कुछ किया? सड़क बनाई? नौकरी दी? यूनिवर्सिटी बनाई?
इल्तिजा कहती हैं, मैं आपकी बहन हूं, बेटी हूं, महबूबा को महबूबा मुफ्ती आपने बनाया। लोग कहते हैं आपकी मां शेर है और शेर का बच्चा शेर है। उनके भाषण में मां की बहादुरी के किस्से भी हैं और नाना के किए कामों की लिस्ट भी। वह कहती हैं मुफ्ती साहब के बाकी बचे काम मुझे करना है। मुफ्ती साहब ईमानदार थे। श्रीनगर में हमारा एक घर तक नहीं। जबकि बाकी नेताओं का एक घर लंदन में, दो दिल्ली में हैं।
इल्तिजा भावुक हो जाती हैं, तो बोलती हैं, मुफ्ती साहब आपको बहुत याद आते हैं, मुझे भी आते हैं। मैं आपका उनकी तरह ख्याल रखूंगी। आर्मी आकर हमारे बच्चों को उठाती थी, तो महबूबा जी आपको बचाती थीं। आज भी पकड़-धकड़ का माहौल है। मैं आपको उससे बचाऊंगी, इंशाअल्लाह...भाषण खत्म भी नहीं हुआ था कि नारे लगने लगे...जब आएंगी मुफ्ती, तो खत्म होगी सख्ती। और आखिर में इल्तिजा कहती हैं, किसी और नेता की गलती की सजा मुझे मत देना। मैं ही आपकी अगली एमएलए हूं।