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धोती-कुर्ता छोड़ नेताजी ने पहना सूट-बूट, रोज कराते हैं फेशियल!

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चुनावी मौसम में पसीने से लथपथ कुर्ता और जोर -जोर से बोलने के कारण भर्रायी आवाज नेताओं की पहचान हुआ करती थी। गलियों और पगडंडियों की धूल कपड़ों पर जगह बनाती थी। सुबह झक सफेद वस्त्रों में निकले नेताजी देर शाम तक जिस्म पर धूल की मोटी परत लिए घर लौटते थे।
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नेताजी भले ही वातानुकूलित कमरों में चाय की चुस्की लेने के आदी रहे हों लेकिन चुनाव के दौरान वह कहीं भी किसी छोटे से ढ़ाबे में चाय-नाश्ता के लिए ठहर जाते थे। वक्त की रफ्तार ने नेताओं की इस पहचान को बदल दिया है।

जम्मू कश्मीर में सियासी दलों के प्रत्याशियों से लेकर उनके समर्थक तक अब सूटेड-बूटेड नजर आते हैं। कुछ नेता चेहरे की चमक बनाए रखने के लिए रोजाना फेसियल भी कराना भी नहीं भूलते।
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कई नेता अपना चुके हैं सूट संस्कृति

खादी के कुर्ते-पजामे को नेताओं की वर्दी समझा जाने लगा था। उससे पहले धोती-कुर्ता का दौर था। चुनाव के दौरान खादी कपड़ों की बिक्री बढ़ जाती थी। सियासी दलों के कार्यकर्ता और नेताओं के समर्थक भी खादी कपड़ों में ही दिखते थे। अब भी छह-सात सौ रुपये के खर्च पर नेताओं की स्थापित वर्दी तैयार हो जाती है लेकिन नेताओं को यह नहीं भाता।

अधिकांश नेता - कार्यकर्ता सफारी और शर्ट-पैंट में ही नजर आते हैं। कश्मीर में खास तरीके से बना कुर्ता पजामा परंपरागत लिबास में शामिल रहा है। कई नेता अब उसे भी त्यागकर सूट संस्कृति अपना चुके हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला कश्मीरी कुर्ता पजामा पहनते हैं लेकिन सूट उनकी भी पसंद है। उमर सियासी शख्सियत के अलावा सिलेब्रिटी के रूप में जाने जाते हैं। अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह भी उनके ड्रेस सेंस की मुरीद रही हैं। इस चुनाव में भी उमर सिलेब्रिटी के रूप में ही दिखना पसंद कर रहे हैं। पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद भी सूटेड-बुटेड ही दिखते हैं। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सलवार सूट में नामांकन करने पहुंची। रंग-बिरंगा स्कार्फ उनकी पहचान में शुमार हो चुका है।
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कॉरपोरेट संस्कृति से प्रभावित सियासत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद भी चुनाव प्रचार के दौरान सूट में ही दिख रहे हैं। पेशे से डाक्टर रहे भाजपा के प्रत्याशी डा. जीतेन्द्र सिंह ने कभी कुर्ता-पजामा नहीं अपनाया। उधमपुर सीट के सभी महत्वपूर्ण प्रत्याशी कुर्ता-पजामा को त्याग चुके हैं। जम्मू संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी जुगल किशोर शर्मा ने जरूर कुर्ता-पजामा के साथ बास्कट(बंडी) धारण कर रखा है।

उनके कुछ समर्थक और कार्यकर्ता भी इस लिबास में दिख रहे हैं। लेकिन उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी मदनलाल शर्मा सफारी को ही पसंद करते हैं। मदनलाल शौक से कभी-कभार कुर्ता पजामा भी धारण कर लेते हैं लेकिन उनकी पसंद सूट ही रही है।

दरअसल अब सियासत भी कॉरपोरेट संस्कृति से प्रभावित हुई है। सियासत पर धन बल का जोर भी बढ़ा है। नेता टीवी पर भी अक्सर नजर आते हैं। ऐसे में वह खुद को स्टार की तरह पेश करना चाहते हैं। मुबंई में आतंकी हमले के बाद तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल द्वारा दिन में कई बार सूट बदलने का मामला चर्चित हुआ था। जिसके बाद उन्हें अपनी कुर्सी भी गंवानी पड़ी थी। अब कई नेता भी चुनाव प्रचार के दौरान कम से दो बार सूट बदलते हैं।
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