जम्मू कश्मीर में फायर एक्ट नहीं होने के कारण कई ऊंची इमारतें आग के मुहाने पर खड़ी हैं। इन इमारतों में आग लगने के दौरान इमरजेंसी दरवाजे और उसे बुझाने के पर्याप्त साधन भी नहीं हैं।
कई बार आग लगने की घटनाओं के कारण करोड़ों रुपये की संपत्ति जलकर राख हो जाती है और जब तक दमकल गाड़ियां घटना स्थल पर पहुंचती हैं, तब तक काफी देर हो जाती है।
दमकल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार फायर एक्ट नहीं होने के कारण कई इमारतों में आग बुझाने के पर्याप्त साधन नहीं हैं। प्राइवेट ही नहीं, सरकारी इमारतों में भी दमकल विशेषज्ञों से कोई भी राय नहीं ली जाती है।
कुछ कंपनियां हालांकि दमकल विभाग से सलाह मशविरा करती हैं और कुछ उपकरण भी लगाती हैं लेकिन पर्याप्त साधन या उपकरण नहीं होने पर दमकल विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।
केंद्रीय विभाग की इमारतों में कुछ सुविधाएं जरूर हैं लेकिन राज्य के सरकारी विभागों की इमारतों में इसकी कमी साफ झलकती है। फायर एक्ट को दमकल विभाग ने सरकार के पास भेजा है लेकिन कई वर्षों से प्रस्ताव लटका है।
राज्य में विशेषकर जम्मू में कई फ्लैट भी बन रहे हैं। इन फ्लैट में पर्याप्त सुविधा है कि नहीं, दमकल विभाग इसकी भी जांच नहीं कर सकता है।
मात्र औपचारिकता पूरी करने के लिए विभाग के पास एनओसी का आवेदन किया जाता है। एनओसी पाने के बाद कोई भी जांच नहीं हो सकती है।
विभाग के डिप्टी डायरेक्टर चंद्र पेशन ने बताया कि फायर एक्ट को गृह विभाग के पास भेजा है। उसे पारित करना अभी बाकी है। एक्ट बनने से सभी इमारतों में आग बुझाने की पर्याप्त सुविधा होगी और घटनाओं में भी कमी आएगी।
निदेशक आरएस सोढी के अनुसार लगातर बढ़ रही आबादी के कारण आग की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे कम करने के लिए लोगों को अपनी इमारतों में पर्याप्त सुविधाएं रखनी चाहिएं।
फायर एक्ट के अनुसार
फायर एक्ट के तहत एक इमारत में कितने इमरजेंसी द्वार होने चाहिए, आग बुझाने के कितने उपकरण होने चाहिए, पानी की पर्याप्त व्यवस्था इत्यादि का प्रावधान है। इमारत कितनी बड़ी है, उसी हिसाब से उपकरण और साधन बनाने होते हैं।