अमरनाथ यात्रा इस साल 28 जून से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगी। बृहस्पतिवार को श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार इस बार यात्रा अवधि 55 दिन होगी। यह पिछले वर्ष की तुलना में 16 दिन अधिक है।
कई हिंदू संगठनों ने ज्येष्ठ पूर्णिमा से यात्रा की शुरुआत न होने पर नाराजगी जताते हुए यात्रा कार्यक्रम में बदलाव की मांग की है। भाजपा ने कहा कि हमें यह स्वीकार नहीं है। भक्तों को यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का असर साफ नजर आएगा।
इस बार यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा हटा ली गई है। श्राइन बोर्ड के मुताबिक, सभी यात्रियों के लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। यात्रियों के लिए हर दो किलोमीटर पर मेडिकल एड सेंटर खोला जाएगा।
बोर्ड के अध्यक्ष राज्यपाल एनएन वोहरा की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई बैठक में सभी सदस्यों की मौजूदगी में यात्रा अवधि और यात्रा के प्रबंधों से जुड़े कई फैसले लिए गए। बोर्ड ने 13 दिसंबर 2012 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत केंद्र, रियासत की सरकार और श्राइन बोर्ड पर अमरनाथ यात्रा के प्रबंधों से जुड़ी सारी जिम्मेदारी निभाने पर अमल के तहत उठाए जा रहे कदमों का भी खुलासा किया।
बोर्ड ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों की कमेटी से स्वास्थ्य प्रमाण पत्र का प्रारूप तैयार करवाया है। इस फार्म के भरने के बाद ही पंजीकरण होगा और यात्रा परमिट मिलेगा। पुलिस पर जिम्मेदारी रहेगी कि स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और पंजीकरण के बगैर कोई यात्रा न कर पाए।
बोर्ड ने फैसला लिया है कि यात्रा परमिट का दुरुपयोग न हो इसके लिए इस साल यात्रा में ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा का प्रावधान नही रखा गया है। यात्रा परमिट प्रत्येक दिन के हिसाब से अलग रंग का होगा।
बढ़ेगी डॉक्टरों की संख्या
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। आपात स्थिति से निपटने को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और एयर फोर्स की मदद ली जाएगी। चयनित जगहों पर पहाड़ी बचाव टीमें भी तैनात होगी।
विशेष पूजा का भी प्रबंध
बोर्ड ने विश्व हिंदू परिषद, बाबा अमरनाथ और बाबा बुड्ढा अमरनाथ यात्री न्यास के यात्रा अवधि, सुझावों और ज्ञापन पर 23 जून ज्येष्ठ अष्टमी पर बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा या अन्य किसी स्थान में विशेष पूजा का प्रबंध करने का भी फैसला लिया है।
बोर्ड ने कहा कि हर यात्रा शिविर में बिजली और पानी की सुविधा मुश्किल कार्य है। 25 जून तक शेषनाग और अन्य स्थानों पर लंगर लगाना भी मुश्किल है। सुरक्षा का भी मसला है। इसलिए यात्रा को 28 जून से शुरू करने का फैसला लिया गया है।
वर्ष कितने दिन रही अवधि कितने यात्रियों ने दर्शन किए (लाख में)
2009 60 3.81
2010 55 4.55
2011 45 6.63
2012 39 6.20