संसद पर हमले के दोषी आतंकी मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी के वक्त भी अपने किए पर कोई पछतावा नहीं था। फांसी दिए जाने से पहले परिवार को लिखे पत्र में अफजल ने अपनी मौत पर शोक नहीं मनाने और जो महानता उसने हासिल की, उसका सम्मान करने को कहा था। अफजल ने फांसी दिए जाने से चंद घंटे पहले पत्नी को पत्र लिखने के लिए पेन और पेपर मांगा था।
आठ लाइन के खत में गुरु ने लिखा है कि मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आप मेरी मौत पर दुख न जताएं बल्कि उन्हें इस महानता का सम्मान करना चाहिए। अफजल के परिवार ने रविवार शाम को उर्दू में लिखे खत को ईमेल के जरिए मीडिया कार्यालयों और सोशल नेटवर्किंग साइट पर जारी किया है। यह खत 9 फरवरी को सुबह 6:25 बजे लिखा गया।
इसमें अफजल ने लिखा है कि मैं अल्लाह का करोड़ों बार शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि उसने इस शहादत के लिए मुझे चुना। मैं अल्लाह के सभी बंदों को बधाई देना चाहता हूं कि हम पूरे वक्त सच्चाई के साथ टिके रहें और मेरी मौत भी सच्चाई के लिए हो रही है। अल्लाह हमारा रक्षक और मददगार है। मैं आप सभी को अल्लाह की हिफाजत में छोड़कर जा रहा हूं।