हीरानगर। केंद्र के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा के सुझाव पर कश्मीर में पत्थरबाजों पर दर्ज मामले वापस लेने की घोषणा के बाद लोगों में रोष देखने को मिला। सियासी व गैर सियासी दलों के नेताओं ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे शहीद जवानों के परिवारों से मजाक बताया।
कांग्रेसी नेता प्रवीन भगत ने कहा कि हर बार ऐसा ही होता है कश्मीरी नौजवान पहले हमारे जवानों को पत्थर मारते हैं और फिर सरकारें उन्हें मासूम साबित करने में जुट जाती हैं। वोट बैंक की राजनीति करते हुए केंद्र व राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है। यह फैसला उन जवानों के परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसे है जिन्हाेंने कश्मीर में शहादत दी।
रामलीला क्लब हीरानगर के प्रधान एवं समाज सेवक नीटू शर्मा ने कहा कि पत्थरबाजों पर रहमदिली किसी मसले का समाधान नहीं है जबकि इस तरह के निर्णय उनके हौसले बुलंद करते हैं। कहा कि पहले भी सरकार ने पत्थरबाजों पर दरियादिली दिखाई थी जिसके परिणाम यह हुए कि पत्थरबाजी की घटनाओं में इजाफा हुआ। हीरानगर व्यापार मंडल प्रधान नीरज गुप्ता ने कहा कि पत्थरबाजों पर हर सरकार नरम रही जबकि इस बार की केंद्र व राज्य सरकार से उम्मीद नहीं थी। पत्थर मारने वालों को अगर इसी प्रकार इनाम मिलते रहे तो जो नौजवान अहिंसा में विश्वास रखते हैं वह भी इसी रास्ते को अपना सकते हैं। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी इस रास्ते को न चुने, रवैया अगर ऐसा ही रहेगा तो पत्थर उठाने वाले हाथ बढ़ेंगे कम नही होगें।