श्रीनगर। आतंकियों की सरेंडर पालिसी में सुधार लाया जाएगा, इसके लिए सुझाव दिए गए हैं। यह बात आईजीपी कश्मीर रेंज मुनीर खान ने कही। उन्होंने कहा कि राह भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए हर प्रयास किया जाएगा। उन्होंने युवाओं के आतंकवाद में शामिल होने के पीछे पाकिस्तानी सोशल मीडिया और अन्य कई कारणों को जिम्मेदार ठहराया। श्रीनगर के पीसीआर में सेना के 2 आरआर सेक्टर कमांडर सचिन मलिक, आईजी सीआरपीएफ जुल्फिकार हसन, डीआईजी साउथ एसपी पानी और एसएसपी कुलगाम श्रीधर पाटिल की मौजूदगी में पत्रकारों को कुलगाम जिले के कुंड काजीगुंड मुठभेड़ के दौरान तीन स्थानीय आतंकियों के जिंदा पकड़े जाने की जानकारी देते हुए आईजीपी मुनीर अहमद खान ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले भी हमने दो आतंकियों को जिंदा पकड़ा था और अब कुंड में जारी मुठभेड़ में तीन आतंकियों को जिंदा ही पकड़ा है। मुनीर खान ने बताया कि आतंकियों के सरेंडर के लिए एक नई सरेंडर पालिसी बनाई जा रही है। इसमें मौजूदा सरेंडर पालिसी की खूबियों और खामियों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। मुनीर खान के अनुसार सरेंडर पालिसी में सुधार लाने के लिए पुलिस ने भी अपने स्तर पर कई सुझाव दिए हैं, जिससे न सिर्फ सरहद पार गए ही नहीं, बल्कि इस तरफ सक्रिय आतंकी भी सरेंडर करने के लिए प्रेरित होंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवकों को आतंकवाद में शामिल होने से रोकने और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के प्रयासों के तहत ही हम प्रयास कर रहे हैं कि अगर मुठभेड़ के दौरान भी कोई स्थानीय आतंकी बंदूक छोड़ हाथ खड़े करता है तो उसे जिंदा पकड़ा जाए। इसके लिए हमारी ओर से आतंकियों को मुठभेड़ के दौरान पूरा मौका दिया जा रहा है। आतंकियों के परिवार वालों से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें सरेंडर के लिए तैयार करें। आईजीपी ने कहा कि काजीगुंड से पकडे गए तीन आतंकियों में से शमसुल और अत्ता मोहम्मद पढ़े-लिखे हैं और अच्छे परिवार से संबंध रखते हैं। उनसे भी इस संदर्भ में बातचीत की जाएगी और उसके आधार पर स्थानीय युवकों को आतंकी बनने से रोकने के लिए लागू की जा रही पालिसी में आवश्यक सुधार किया जाएगा। आईजीपी ने कश्मीर में बीते तीन-चार महीनों के दौरान 40 से अधिक स्थानीय लड़कों के आतंकी बनने की बात से इंकार करते हुए कहा कि हमने दो दर्जन से ज्यादा लड़कों को आतंकी बनने से बचाया भी है।