जम्मू कश्मीर पुलिस के कांस्टेबलों को मिलने वाले रिस्क अलाउंस के नाम पर मजाक किया जा रहा है। आतंकवाद ग्रस्त इलाकों, यहां हमेशा जान जाने का खतरा रहता है। वहां भी जवानों को रिस्क अलाउंस न के बराबर है। अन्य केंद्रीय पुलिस बल के मुकाबले रियासत पुलिस के जवानों को मिलने वाला अलाउंस न के बराबर है।
सीआरपीएफ के जवानों को कश्मीर में ड्यूटी देने पर प्रति माह 7500 रुपये रिस्क अलाउंस मिलता है। जबकि जम्मू कश्मीर पुलिस के कांस्टेबलों को मात्र 75 रुपये प्रति माह मिलता है। हेड कांस्टेबलों को 100 रुपये मिलता है। वहीं पुलिस के जवानों को हार्डशिप अलाउंस भी 10 फीसदी मिलती है। जबकि सीआरपीएफ जवानों को 20 फीसदी मिलती है। कश्मीर में चाहे खराब हालातों में ड्यूटी देनी हो या फिर आतंकवाद के खिलाफ चलने वाले आपरेशन में। दोनों ही जगहों पर सीआरपीएफ और पुलिस को बराबर ड्यूटी देनी पड़ती है। लेकिन सीआरपीएफ की तुलना में राज्य पुलिस को काफी कम सहूलियतें मिलती हैं। जबकि हर महीने कांस्टेबलों के वेतन से डेढ़ करोड़ रुपये पुलिस वेलफेयर फंड काटा जाता है।
एक पुलिस कांस्टेबल ने कहा कि आतंकवाद ग्रस्त इलाकों में ड्यूटी देने पर पता नहीं कब जान चली गई। लेकिन रिस्क अलाउंस कम है। हर दिन के हिसाब से देखा जाए तो तीन रुपये बनते हैं। जानी हमारी जान की कीमत तीन रुपये है। वहीं एक पुलिस के सीनियर अधिकारी का कहना है कि अलाउंस बढ़ाने का प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा हुआ है। जल्द ही इस पर सहमति बन जाएगी।