एक ओर जहां सरकार बिजली तंत्र में सुधार करने के दावे करती है, वहीं आज भी तहसील के कई इलाकों में बिजली के तार खंभों की जगह पेड़ पर बांधे गए हैं। कंडक्टर की जगह क्रेट वायर इस्तेमाल में लाई जाती है। बसोहली के कई इलाकों में बिजली के तार जमीन से कुछ ही फुट ऊपर लटके हुए हैं, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। वहीं, जगह-जगह जमीन पर खुले में रखे ट्रांसफार्मर भी हादसों को न्योता दे रहे हैं। बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफार्मरों को ऊंचाई और लोगों की पहुंच से दूर करने के लिए तारबंदी की जानी चाहिए, लेकिन वह नहीं कर रहा है। ऐसे में खेलने वाले बच्चों के साथ ही मवेशियों की जान को भी खतरा रहता है।
स्थानीय निवासी तिलकनाथ, अंकित शर्मा, आयुष गौर का कहना है कि कस्बे में कई छोटे-बड़े ट्रांसफार्मर कम ऊंचाई पर बिना तारबंदी के लगे हैं। इनसे निकलने वाले तार जमीन से चार पांच फुट की ऊंचाई मात्र पर लटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन ट्रांसफार्मरों से चिपक कर कई मवेशियों की भी मौत हो चुकी है। इसके बाद भी विभाग न तो ट्रांसफार्मरों की तारबंदी के लिए कोई कदम उठा रहा है और न ही ट्रांसफार्मरों को ऊंचाई पर लगवा रहा है। लिहाजा विभाग को चाहिए कि जो ट्रांसफार्मर बिना तारबंदी के हैं, उनकी तारबंदी के लिए विभाग जल्द कदम उठाए।