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घाटी में सिनेमा हॉल खुलने पर शुरू हुई बहस

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अमृतपाल सिंह बाली
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श्रीनगर।
सऊदी अरब में सिनेमा हॉल खोलने के फैसले के बाद कश्मीर में एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। कई सिनेमा हॉल खुलने के हक में हैं तो कई इसे सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से एक नई चुनौती मानते हैं।
सऊदी अरब के बाद कश्मीर में भी सिनेमा हॉल खोलने को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों की ओर से आवाजें उठती दिख रही हैं। राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने जैसे ही सऊदी अरब के इस फैसले को सराहा तो विपक्ष के नेता जुनेद मट्टू ने महबूबा के ट्वीट को रीट्वीट कर आड़े हाथों लेते हुए कहा- ‘कश्मीर में भी अब वक्त आ गया है सिनेमा खोलने का। यह एक गैर राजनैतिक मुद्दा है और अब इसमें और विलंब नहीं होना चाहिए। हमें लोगों में शांति और स्थिरता के साथ एक सामान्य, सामाजिक जीवन की झलक देनी है। सिनेमाघरों को फिर से खोलना न तो संघर्ष को नकारता है और न इसे हल करने की आवश्यकता को।’
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कश्मीर में फिल्म जगत और आर्ट से जुड़े लोगों का भी मानना है कि घाटी में सिनेमा कल्चर की फिर शुरुआत हो। कश्मीरी फिल्म मेकर मुश्ताक अली खान के अनुसार फिल्म न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि जागरूक होने का भी साधन है। सिनेमा बंद नहीं होना चाहिए था लेकिन ऐसी चीजें दिखानी चाहिए जो विवादों पर आधारित न हो। इसे सेंसर करने के लिए कुछ होना चाहिए और अच्छी फिल्में दिखाई जानी चाहिए। वही फिल्में दिखाई जाए, जिससे कश्मीर के कल्चर और लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस ना पहुंचे। बाकी रहा सुरक्षा का सवाल तो जब सरकार बड़े-बड़े कंसर्ट, राजनैतिक सभाओं को आयोजित कर सकती है तो सिनेमा हॉल को सुरक्षा क्यों नहीं प्रदान कर सकती है।
स्थानीय नासिर गिलानी ने बताया कि वह समझता है कि सिनेमा हॉल खुलने चाहिए, क्योंकि यह मनोरंजन का एक साधन है। अगर सिनेमा हॉल खुलते हैं तो लोगों को एक्सपोजर मिल सकता है। जो संगठन इसका विरोध कर रही हैं, वह इससे परहेज करे, क्योंकि यह व्यक्ति की अपनी मर्जी है वह जाए या न जाए। यहां शराब के ठेके हैं, जिसे नहीं पीनी वह नहीं जाता और जिसे पीनी है वह जाता है। जबरदस्ती से कुछ नहीं होता। फिरदौस इलाही का कहना है कि मुद्दा यह नहीं कि सिनेमा हॉल खुलने चाहिए। मुद्दा यह है कि सुरक्षा एजेंसियां किस तरह से सुरक्षा के प्रबंध करेगी क्योंकि सऊदी अरब और कश्मीर के हालात में बहुत अंतर है।
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बंद हॉल खोलने की दो बार हो चुकी है कोशिश
90 के दशक से पहले केवल श्रीनगर में 8 सिनेमा हॉल थे, मगर तब सक्रिय आतंकी संगठन अल्लाह टाइगर्स ने सिनेमा और शराब पर पाबंदी लगा दी थी। केवल एक हफ्ते में श्रीनगर सहित कश्मीर के सभी सिनेमा हॉल और शराब की दुकानें, बार बंद हो गए थे। तबसे सरकार ने दो बार कोशिश की। पहले 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कोशिश पर लाल चौक में रीगल सिनेमा में एक शो चला था, मगर उसके बाद वहां ग्रेनेड विस्फोट के चलते एक की मौत हुई और एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। कु छ दिन बाद श्रीनगर में ब्रॉडवे और नीलम सिनेमा हॉल को खोला गया मगर नीलम में हुए आतंकी हमले के बाद लोग सिनेमा हॉल को असुरक्षित समझने लगे और दर्शक कम होने के कारण दोनों हॉल बंद हो गए।
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