मुख्यमंत्री से मिले 70 शिष्टमंडल
संगठनों ने रखी जन समस्याएं
अमर उजाला ब्यूरो
सांबा।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवार को सांबा जिला मुख्यालय में एक पब्लिक दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी और समाधान का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सुबह ग्यारह बजे जिला मुख्यालय नंदनी पहुंची। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों, सामाजिक संगठनाें और राजनीतिक संगठनों के शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिले। अपनी अपनी समस्याएं उनके सामने रखी। किसान यूनियन के कर्ण सिंह व द्वारका नाथ ने 2014 में नष्ट हुई फसलाें के मुआवजे की मांग रखी। वहीं, पेस्टीसाइड कारखानाें के कारण किसानों के हो रहे नुकसान से जागरूक करवाया। विस्थापित संगठन के चौधरी गार सिंह, पूर्व सरपंच दर्शन सिंह ने 1965 के विस्थापितों को भूमि के मालिकाना अधिकार के बारे में मांग रखी। वहीं, उन्हाेंने आरबीए का दर्जा देने की भी मांग की। वही, एक मुश्त पैकेज में हो रही देरी की का मुद्दा भी उठाया। कसबा के सामाजिक संगठन के केसी पठानियां, स्वर्ण सिंह ने किले के मरम्मत की मांग उठाई। वही, किले के विकास पर खर्च हुए फंड के जांच की मांग भी उठाई। पूर्व विधायक यश पाल कुंडल ने सीमांत लोगाें को पांच पांच मरला प्लाट देने की मांग रखी। सांबा में महिला कालेज के बारे में भी अवगत करवाया। पीडीपी नेता हरमेश सलाथिया ने सांबा, विजयपुर व बाडी ब्राहमणा सिडको चौक पर फलाई ओवर बनाए जाने की मांग रखी। सामाजिक कार्यकर्ता मास्टर सतपाल शर्मा ने तारबंदी को जीरो लाईन पर ले जाने के बारे में बताया। पूर्व सरपंच पूर्ण चंद ने कठाड गांव को महौरगढ़ के साथ ही रखने की मांग की। सांबा डेवलपमेंट फोर्म के विनोद मिश्रा व पूर्व विधायक सोमनाथ ने जिला अस्पताल को जिला में जिला स्तर का इंफास्ट्रक्र देने की मांग उठा। आल जेएंडके नान गजटेड इंपलाईज यूनियन के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बताया कि एसआरओ 202 के अंतर्गत लगाए गए लोगों को केवल सात हजार वेतन ही दिया जा रहा है। वहीं, उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। संगठन की नीधि शर्मा ने कहा की एक और सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। जबकि पढ़ी लिखी बेटियाें के साथ गलत बर्ताव हो रहा है। सीमा जन कल्याण समिति के त्रिभुवन शर्मा ने तारबंदी को जीरो लाईन पर ले जाने, सीमांत गांव में केन्द्रीय विद्यालय खोले जाने, सीमावर्ती गांवों में विकास में तेजी लाई जाने की मांग रखी, पूर्व मंत्री स. मंजीत सिंह, व्यापार मंडी, राजपूत सभा, इंडस्ट्री एसोसिएशन, गुज्जर बकरवाल संगठन, घगवाल विकास कमेटी के सदस्यों ने भी अपने अपने क्षेत्र की समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने उठाया।