फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहीद सब इंस्पेक्टर को दी अंतिम विदाई

विज्ञापन
विज्ञापन
उधमपुर। शहीद होने वाले वीर सपूत इमरान टाक को शनिवार को पुलिस लाइन में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। उप मुख्यमंत्री ने शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि टाक की शहादत पर हमें गर्व है। उनकी वीरता के लिए राज्य सरकार से शौर्य चक्र देने की सिफारिश की जा रही है।
विज्ञापन

श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र जकुरा में शुक्रवार शाम को आतंकियों द्वारा पुलिस पार्टी पर किए गए हमले में उधमपुर जिला अंतर्गत पड़ने वाले बसंतगढ़ के सपूत सब इंस्पेक्टर इमरान टाक ने शहादत पाई। जिस तरह से उन्होंने आतंकियों से लोहा लेते हुए शहादत पाई, उससे उनको पूरा देश सलाम कर रहा है। इमरान टाक का पार्थिक शरीर को शनिवार की सुबह लगभग साढ़े सात बजे पुलिस लाइन में पूरे सम्मान के साथ लाया गया। यहां पर उनके पार्थिव शरीर को सशस्त्र बल से सलामी दी। मातमी धुन बजाई। सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। इस अवसर पर राज्य के उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उनके साथ मंत्री नईम अख्तर, सत शर्मा, डीजीपी, डीसी, एसएसपी सहित पुलिस के कई अधिकारियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।
उधमपुर पुलिस लाइन में इमरान टाक की पत्नी और परिवार वालों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित की। परिवार वाहनों के विलाप देख वहां मौजूद हर सख्त की आंखें नम हो गईं। परिवार को यकीन नहीं हो रहा था कि इमरान अब उनके बीच नहीं हैं। इसके बावजूद उनके परिवार को इमरान की शहादत पर गर्व है। उनके चाचा ने बताया कि जिस तरह से उसने अपने वतन के लिए कुर्बानी दी है, उससे हम गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि आतंकवाद का खात्मा किया जाए। ताकि बेगुनाह लोगों का खून न बहे। उन्होंने यह भी बताया कि परिवार ने बहादुर बेटा खोया है, जिसकी भरपाई मुश्किल है।
विज्ञापन

------------

बचपन से ही था बेल्ट फोर्स में जाने का सपना
उधमपुर। इमरान टाक की शहादत को जिसने भी सुना उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था। उनकी पत्नी बार-बार बेसुध हो रही थी, जिन्हें पुलिस की महिला अधिकारियों ने संभाल रखा था। टाक अपने पीछे पत्नी, तीन साल की बेटी, माता-पिता, दो भाई ओर दो बहनों को छोड़ गए हैं। शहीद के चाचा मुहम्मद शफीक वानी ने बताया कि वह घर में सबसे छोटा था। इस कारण वह सबका लाडला था। वह परिवार का रीढ़ था। उसके पिता सेवानिवृत्त लेक्चर हैं और माता गृहणी। बचपन से ही इमरान देशभक्त था। वह बेल्ट फोर्स में जाना चाहता था। पढ़ाई के साथ-साथ हर काम में वह आगे रहता था। गांव के रहने वाले शहीद के दोस्त प्रीतम सिंह ने बताया कि वह दोनों बचपन के दोस्त थे। हर काम में आगे रहने के साथ ही गांव में सबका चहेता था इमरान। उसमें दिलेरी और देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी। वह बहुत अच्छा दोस्त था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें