सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण चुनाव में खलल डालने के आतंकी मंसूबे ध्वस्त हुए, लेकिन, विदेशी आतंकियों की घाटी में मौजूदगी ने सुरक्षा बलों की चिंताएं बढ़ा दीं हैं।
घाटी में अब भी लगभग 300 आतंकी मौजूद हैं। इनमें पाकिस्तानी आतंकी भी शामिल हैं। लश्कर ए तैयबा फिर से सक्रिय हुआ है।
चुनाव के दौरान इस आतंकी संगठन ने सबसे अधिक वारदातों को अंजाम दिया। हिजबुल अब पंच-सरपंचों के अलावा सियासी कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहा है जबकि लश्कर ने सुरक्षा बलों को टारगेट बनाया हुआ है।
लश्कर के नए नकाब?
रियासत की सभी सीटों पर चुनाव संपन्न हो जाने के बाद भी सुरक्षा बलों और सेना ने आतंकियों की तलाश जारी रखने का निर्णय लिया है।
लश्कर और जैश ए मोहम्मद ने नए नकाब लगाकर वारदातों को अंजाम देना शुरू किया था। इसी क्रम में शोहादा ब्रिगेड, अल नसरीन और फरजंदन ए मिल्लत नाम से तीन आतंकी संगठन खड़े हुए। ये संगठन मुख्य रूप से फिदायीन हमले करते हैं।
चुनाव के क्रम में इन नए संगठनों की गतिविधियां कम रहीं और लश्कर ने ही घटनाओं को अंजाम दिया। हिज्ब और एलईटी ने मिलकर पिछले डेढ़ महीने में आतंकी घटनाओं के ग्राफ में उछाल ला दिया।
रोज हो रहे आतंकी हमले
अक्तूबर के बाद से हर माह औसतन एक आतंकी हमला हो रहा था, लेकिन, चुनाव के दौरान अप्रैल से मई में अब तक आठ हमले हो चुके हैं। इसमें सेना के एक मेजर, एक जेसीओ समेत सेना और पुलिस बल के छह कर्मी शहीद हुए।
सुरक्षा बलों ने 9 आतंकियों को ढेर किया। चार पंच-सरपंच भी शहीद हुए। श्रीनगर में पुलिस की गोली से एक युवक भी मारा गया। सुरक्षा बलों के सामने अब आतंकियों की तलाश की चुनौती है।