दुनिया के सबसे मंहगे मसाले के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले केसर की खेती को जिले में दम तोड़ दिया है। पांच वर्ष पहले ट्रायल के तौर पर कठुआ जिले के दूरदराज इलाके बनी और डुग्गन ब्लाक के 14 सर्किलों में केसर की खेती शुरू की गई। पहले ही साल सफलता मिलने पर अगले वर्ष किसानों ने और बड़े स्तर पर केसर की खेती करने का फैसला लिया। पहले साल जहां कृषि विभाग ने किसानों को 12 क्विंटल केसर के बल्ब नि:शुल्क वितरित किए थे, वहीं अगले वर्ष इसे बढ़ाकर 18 क्विंटल कर दिया गया। लेकिन, मुफीद मौसम न होने से किसानों की मेहनत धरी की धरी रह गई। ऐसे में पिछले दो वर्ष से इलाके में केसर की खेती नहीं हो पाई है।
केसर की खेती से जुड़े कृषक योगराज, अल्ताफ, लियाकत अली, जनता सिंह, सुदेश कुमार आदि ने बताया कि उनके इलाके में कुछ साल पहले विभाग द्वारा किसानों को इस खेती के प्रति प्रोत्साहित करने का प्रयास किया। पहले साल के परिणाम अच्छे रहे, जिसे देखते हुए और भी कई कृषक इस खेती की ओर आकर्षित हो रहे थे, लेकिन दूसरे वर्ष में केसर के बल्ब पहले वर्ष से भी कम हुए और किसानों की मेहनत व्यर्थ गई। तीसरे वर्ष तो हालत इससे भी बदतर हो गए। ऐसे में पिछले दो साल में केसर की खेती पर ब्रेक लगा हुआ है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
खेती के बाद दूसरे वर्ष केसर के बल्ब पहले वर्ष से भी कम रहे। इसे देखते हुए किसानों को इसकी खेती न करने की सलाह दी गई। केसर की खेती से किसानों को भी अच्छी आय की उम्मीद थी। लेकिन, प्रयोग सफल नहीं होने से किसानों को भी मायूसी हाथ लगी है। केसर की खेती को ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया था, लेकिन दो वर्ष पूर्व शुरू हुए इस ट्रायल पर ब्रेक लगा है।
-नंद किशोर, मुख्य कृषि अधिकारी