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सड़क सुविधा न होने से गांव हुआ वीरान

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रेलवे ट्रैक ने छीना चैनपुरा का चैन
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1967 से पहले गांव को जोड़ने वाली सड़क के बीच में रेलवे लाइन आने से अब वहां सीधे नहीं जा सकते वाहन

अमर उजाला ब्यूरो
हीरानगर।
हर किसी की तमन्ना होती है कि उनके इलाके का विकास हो। उनके गांव के लिए सड़क हो, रेल संपर्क और अन्य सुविधाएं हों, लेकिन यदि योजनाबद्ध विकास न होे तो यह परेशानियां भी पैदा कर सकता है। ऐसा ही एक मामला हीरानगर सब डिवीजन के चैनपुरा गांव से जुड़ा है। हाईवे से महज एक किलोमीटर की दूरी पर बसे चैनपुरा गांव में आज भी कोई व्यक्ति अपने वाहन से सीधे नहीं जा सकता है। 1967 से पहले इस गांव का संपर्क हाईवे से सीधे जुड़ा था, लेकिन रेलवे ट्रैक बनने के बाद यह संपर्क टूट गया। स्थानीय लोगों ने इसके लिए क्रासिंग की मांग की और कई बार आंदोलन भी किए गए, लेकिन सरकार के कानों तक ग्रामीणों की गुहार नहीं पहुंची।
हालत यह है कि चैनपुरा गांव में यदि किसी ग्रामीण को कोई रिश्तेदार अपने वाहन से आना चाहे तो उसे दूसरे गांव में अपना वाहन खड़ा कर फिर आगे जाना पड़ता है। यदि कोई बीमार हो जाता है तो एंबुलेंस को भी दूसरे गांव में रोककर वहां तक मरीज को उठाकर पहुंचाना पड़ता है। लगभग छह किलोमीटर का सफर तय कर हाईवे तक पहुंचा जा सकता है, लेकिन वह रास्ता भी चौपहिया वाहनों के चलने लायक नहीं हैं। दोपहिया वाहन ही गांव में आने-जाने का एकमात्र साधन हैं, लेकिन हाईवे पर आने के लिए ट्रैक पर वाहन उठाकर उसे पार करना पड़ता है।
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पचास फीसदी से ज्यादा परिवारों ने किया पलायन
इसके चलते पहले जहां चैनपुरा गांव में 67 परिवार रहते थे, वहीं अब महज 25-26 परिवार ही यहां बचे हैं, अन्य लोगों में से कुछ लोग ने शहर में चले गए तो कुछ पास के गांवों में बस गए। जो यहां से जा चुके हैं, उनके बंद पडे़ मकान यहां रह रहे लोगों के हौसले कमजोर कर रहे हैं। ऐसे में नई पीढ़ी भी यहां से निकलने के लिए अपने परिजनों पर दबाव बना रही है। दूसरे गांव में जाकर बसे दलजीत सिंह, शिव शर्मा का कहना था कि कोई भी अपनी जन्मभूमि को नहीं छोड़ना चाहता है, लेकिन सड़क संपर्क की सुविधा नहीं होने से उन्हें अपने प्यारे गांव से जाने पर मजबूर कर दिया। आज भी यदि गांव सड़क से जुड़ जाए तो वे वापस लौटना चाहेंगे और सिर्फ वे ही नहीं, बल्कि बाहर बसे बाकी लोग भी इसकी इच्छा रखते हैं।
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