बसोहली/कठुआ। बसोहली कसबा जल्द ही प्रदूषण मुक्त होने वाला है। सरकार ने बसोहली में सालिड-लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए हुए सर्वे को मंजूरी दे दी है। इसके लिए एक करोड़ राशि तय है। इस पर काम जल्द शुरू होगा। इसके लिए 50 कनाल भूमि पहले ही चिह्नित की जा चुकी है।
कसबे से आठ से दस किलोमीटर दूर रैहण में इसे बनाने की योजना है। सूत्रों के अनुसार सालिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट पर लगभग 21 लाख खर्च आने का अनुमान है, जबकि 500 केएलडी के लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए लगभग 79 लाख रुपये का खर्च आएगा। इस परियोजना को प्रदूषण नियंत्रण विभाग के चेयरमैन की देखरेख में आगे बढ़ाया जाएगा।
वह बुधवार को सचिवालय में अधिकारियों की बैठक में इसकी जानकारी भी दी है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत सरकार ने जैविक और ठोस कचरे के संग्रह के लिए हर घर के लिए दो कूड़ेदान को मंजूरी दी गई है। बसोहली कसबे के तेरह वार्ड की लगभग छह हजार आबादी को जागरूक करने की प्रक्रिया के साथ-साथ इस परियोजना के लिए निविदा आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस परियोजना की हद में कसबे के 1106 घर, 160 व्यवसायिक संस्थान, एक बैंक्वेट हाल से लेकर दस प्राइमरी से कॉलेज स्तर के संस्थान भी आएंगे। वर्तमान में कसबे से कचरा एकत्रित कर पांच जगहों पर लाया जाता था, लेकिन इसे नष्ट करने का कोई प्रबंध नहीं था। बसोहली नगर कमेटी के पास चौदह नियमित और ग्यारह दैनिक सफाई कर्मचारी हैं। कसबे से तीन बड़े नालों से गंदगी रंजीत सागर झील में गिरती रही है। नई योजना के मुताबिक इन नालों को अब वार्ड दस में पड़ने वाले शांट घाट के नजदीक नाले की ओर डायवर्ट करने की योजना है।
परियोजना का उद्देश्य
बसोहली कसबे को खुले में शौच मुक्त करना
आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरे का प्रबंधन
स्वच्छता के प्रति लोगों में व्यवहारिक बदलाव लाना
मैनुअल सफाई प्रणाली को समाप्त करना
क्या है योजना
एडीसी बसोहली संजय गुप्ता ने बताया कि बसोहली में बनने वाले सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट राज्य में अपनी ही तरह का पहला प्रबंधन होगा। लोगों से कचरा एकत्रित करने के लिए दो तरह के डस्टबिन उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसे जैविक और अजैविक के आधार पर बांटा जाएगा। वैज्ञानिक तरीके से इस कचरे का निपटान किया जाएगा। कसबे के प्रत्येक घर से आटो की मदद से कचरा एकत्रित कर रैहण तक पहुंचाया जाएगा। जैविक कचरे का इस्तेमाल पेड़ों की खाद के रूप में किया जाएगा जबकि अजैविक कचरे को कई ट्रीटमेंट के बाद रिसाइकिल किया जाएगा। इससे न सिर्फ कचरे का निपटान होगा बल्कि नगर कमेटी की आय में भी वृद्धि होगी। इस योजना को अमल में लाने के लिए वन मंत्री की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
कचरामुक्त होगा कसबा और मालामाल होगी नगर कमेटी
नगर कमेटी बसोहली कसबे के 1106 घरों से प्रतिमाह पचास रुपये कचरा उठाने का शुल्क वसूलेगी। 160 व्यवसायिक संस्थानों से भी इतना ही वसूला जाएगा। घरों से एकत्रित शुल्क से कमेटी को प्रति वर्ष जहां 6,63,600 रुपये की आमदनी होगी। वहीं व्यवसायिक संस्थानों से 96,000 रुपये प्रतिवर्ष हासिल हाेंगे। कंपोसिटिंग के जरिये प्रतिवर्ष एक लाख बीस हजार की आय बढ़ेगी तो अजैविक मैटेरियल से लगभग एक लाख अस्सी हजार रुपये प्रतिवर्ष की आमदनी नगर कमेटी बसोहली को हासिल होगी।