रामनगर। रामनगर के किडमु गांव निवासी ट्रक ड्राइवर रमेश तथा उसे बेटे जीतू का शव मंगलवार को जैसे ही गांव पहुंचा कि पूरे गांव के लोगों की आंखें छलक पड़ी। माहौल गमगीन हो गया। गांव में जैसे सन्नाटा पसर गया। ग्रामीणों की जुबान पर बस यही सवाल था कि किसका क्या बिगाड़ा था इन बाप-बेटों ने? दोपहर को जब बाप-बेटे की अर्थी घर से एक साथ निकली तो बड़ी संख्या में लोग उनको अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचे।
गौरतलब है कि ट्रक चालक रमेश कुमार कुछ दिन पहले कश्मीर से सेव लदे ट्रक को लेकर कोलकाता के लिए बेटे जीतू को साथ लेकर निकला था। इन दोनों के अलावा ट्रक का सहचालक भी था। लेकिन सोमवार को पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों से तीनों के शव मिले। पिता का शव मुकेरियां में तो पुत्र का शव जालंधर में मिला। तीसरे सहचालक का शव कहीं और मिला। तीनों की निर्मम हत्या कर फेंका गया। ट्रक भी लापता है। सहचालक पंजाब का रहने वाला था।
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रमेश के घर में नहीं बचा कोई कमाने वाला
रमेश कुमार और उसके बेटे की हत्या हो जाने के बाद उसके परिवार में कमाने वाला कोई सदस्य नहीं बचा है। इससे परिवार वालों पर और भी बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है। उसके परिवार का पालन-पोषण मुश्किल हो गया है।
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निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाने की मांग
रमेश के परिवार वालों तथा गांव के लोगों ने रमेश तथा उसके बेटे जीतू की हत्या के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र होने की आशंका व्यक्त की है। उनका कहना था कि रमेश की किसी से भी कोई दुश्मनी नहीं थी। वह हंसमुख था। घर में भी कमाने वाला अकेला था लिहाजा वह बेवजह किसी से बात नहीं करता था। अपने काम में मशगूल रहता था। ऐसे में पिता-पुत्र की हत्या का किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच होनी चाहिए। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।