परिचित कैदी से मिलने गए सिख को धार्मिक चिन्ह कृपाण के साथ जेल में प्रवेश नहीं देने के एक मामले में हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह नोटिस बलविन्दरसिंह संधू की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता गत दिनों अपने किसी परिचित से मिलने के लिए जयपुर केन्द्रीय कारागृह गया था। इस दौरान उसने अपने धर्म के प्रतीक चिन्ह के रुप में कृपाण धारण कर रखी थी, लेकिन जेल प्रशासन ने कृपाण को हथियार बताते हुए जेल में प्रवेश देने से इंकार कर दिया। जिसके चलते वह परिचित कैदी से मुलाकात नहीं कर सका।
याचिका में कहा गया कि कृपाण हथियार न होकर धर्म का प्रतीक है। धार्मिक आस्था के चलते याचिकाकर्ता उसे हर वक्त धारण कर रखता है। अन्य संवेदनशील स्थानों पर कृपाण के साथ आसानी से प्रवेश मिल जाता है। ऐसे में याचिकाकर्ता को कृपाण के साथ जेल में जाकर कैदी से मुलाकात करने की अनुमति दी जाए। जिस पर सुनवाई करते हएु एकलपीठ ने जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।