राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख ऊर्जा सचिव, आरआरवीयूएनएल, एनटीपीसी और बारां कलक्टर को नोटिस जारी कर पूछा है कि छबड़ा पावर प्लांट का संचालन एनटीपीसी को हस्तांतरित करने का एमओयू क्यों न रद्द कर दिया जाए।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश मनोज तिवारी की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता प्रदीप माथुर ने अदालत को बताया कि लाभ में चल रहे छबड़ा थर्मल पावर प्लांट को एनटीपीसी को दिया जा रहा है। विद्युत उत्पादन निगम और एनटीपीसी के बीच गत 11 जनवरी को इस संबंध में एमओयू भी हो चुका है। याचिका में कहा गया कि एनटीपीसी को प्लांट देने से वर्ष 2017-18 के लिए बिजली के उत्पादन की लागत 19 पैसा प्रति युनिट बढ़ जाएगी।
ऐसे में सन् 2041-42 तक विद्युत उत्पादन की क्षमता वाले प्लांट पर सात हजार करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त भार पड़ेगा। जिसको आखिर में जाकर प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा। याचिका में यह भी कहा गया कि अकाउंटेट जनरल अपनी गत 17 फरवरी की रिपोर्ट में मान चुके हैं कि प्लांट का पूरी तरह से हस्तान्तरण राज्य सरकार के हित में नहीं है।
याचिका में गुहार की गई है कि प्लांट को हस्तान्तरित करने के संबंध में हुए एमओयू को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।