राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और प्रमुख जल संसाधन सचिव को नोटिस जारी कर पूछा है कि वर्ष 1994 में यमुना नदी के जल बंटवारे को लेकर हुए समझौते के तहत क्या कार्रवाई की जा रही है।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश यशवर्धन सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि वर्ष 1994 में यमुना नदी के पानी के बंटवारे को लेकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हिमाचल सहित राजस्थान के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत राजस्थान को 1.19 क्यूबिक मीटर पानी मिलना था। वर्ष 1995 में इस समझौते को अपर रिवर यमुना बोर्ड ने भी अपनी स्वीकृति दे दी। यह पानी हरियाणा के ताजेवाला हैड से आना था।
हरियाणा के सिंचाई विभाग ने भी पानी देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। हरियाणा सरकार ने राजस्थान सरकार के सामने प्रस्ताव रखा था कि राजस्थान नई नहर का निर्माण कर अथवा वर्तमान नहर की मरम्मत कर यह पानी ले सकता है। पानी के बंटवारे को लेकर किसी तरह का कोई विवाद नहीं होने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से पानी लाने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।