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नायडू ने स्टूडेंट्स से शेयर किए खट्टे-मीठे अनुभव, बताया हिंदी को लेकर क्या था उनका नजरिया

Sat, 06 Jan 2018 07:15 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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एमएनआईटी में आयोजित दीक्षांत समारोह का संबोधित करते उपराष्ट्रपति - फोटो : Amar Ujala
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उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आज जयपुर में अपने जीवन से जुड़े खट्टे-मीठे अनुभव स्टूडेंट्स के साथ शेयर किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे किसी जमाने में हिंदी विरोधी रहे हैं, लेकिन वे जल्द समझ गए कि हिंदी ही इस देश में किसी भी व्यक्ति के विकास का माध्यम है।
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उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने यह जानकारी आज जयपुर में मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNIT) के 12वें दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने हिन्दी के महत्व को समझाते हुए कहा कि जब वे राजनीति में आए थे तो उस समय दक्षिण भारत में हिंदी विरोधी आंदोलन चल रहा था। उन्होंने इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

उन्होंने कहा आंदोलन के समय जब उन्होंने अपने साथियों से पूछा कि हिंदी कहां है? साथियों ने बताया पोस्ट आॅफिस और रेलवे स्टेशन पर होती है। बस, फिर क्या था, कोलतार लेकर वहां पहुंचे और हिंदी में लिखे नामों पर उसे पोत दिया। उन्होंने कहा कि जल्द ही उनका हिंदी को लेकर नजरिया बदल गया। उन्होंने कहा कि हिंदी के बिना किसी भी व्यक्ति का इस देश में विकास संभव नहीं है।
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टेम्पररी पेन फॉर लॉन्ग टर्म गेन - नायडू

उपराष्ट्रपति का जयपुर एयरपोर्ट पर स्वागत करती सीएम वसुंधरा राजे - फोटो : Amar Ujala
नोटबंदी और जीएसटी को लेकर केंद्र सरकार के अहम फैसलों पर उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा कि ये लॉंग टर्म गेन के लिए टेम्पररी पेन है। उन्होंने कहा कि बड़े फायदे के लिए इस तरह के छोटे नुकसान या परेशानी आ सकती है।

ऐसे कदम आमूलचूल सुधार लाते है जो देश के लिए लाभकारी होते है। नोटबंदी से बैडरूम और बाथरूम में रखा पैसा पति और पिता के माध्यम से बैंक तक पहुंचा है। उन्होंने छात्रों से इस बारे में पूछा कि यह कदम अच्छा है या ​नहीं? इसी तरह जीएसटी को भी उन्होंने बड़े आर्थिक सुधार का माध्यम बताया। 
  
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