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उर्दू में यह रामायण मौलवी ने लिखी थी, दिवाली पर होता है इसका पाठ

Mon, 16 Oct 2017 06:14 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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- फोटो : demo
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उर्दू में रामायण को एक मौलवी ने 1935 में लिखा था। दिवाली पर इसका पाठ करने की परम्परा शुरू हुई जो आज भी जारी है। इस बार भी इस रामायण का पाठ हुआ।  
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राजस्थान के बीकानेर में हर साल दिवाली से पहले एक अनूठा आयोजन होता है। यह कार्यक्रम पर्यटन लेखक संघ और महफिल-ए-अदब संस्था करती है। इस आयोजन के दौरान उर्दू में लिखी इस रामायण का पाठ किया जाता है। रविवार को यह कार्यक्रम बीकानेर में आयोजित हुआ।  

मिली जानकारी के अनुसार, इस रामायण को वर्ष 1935 में लखनऊ के मौलवी बादशाह हुसैन राणा लखनवी ने बीकानेर में लिखी थी। उस वक्त यहां पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की ओर से अपनी मातृभाषा में कविता के रूप में रामायण लिखने की एक प्रतियोगिता आयोजित हुई थी। उस वक्त मौलवी राणा बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह के यहां उर्दू-फारसी के फरमान अनुवाद किया करते थे।
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सिर्फ नौ पेज की है यह रामायण

- फोटो : DEMO PHOTO
इस रामायण को उर्दू में छंद में लिखी सबसे अच्छी रामायण माना जाता है। यह सिर्फ नौ पृष्ठों की है और इसमें 27 छंद है। हर छंद में छह-छह लाइनें हैं। 

कहा जाता है कि मौलवी राणा ने अपने कश्मीरी पंडित मित्र से रामायण के किस्से सुने थे। इसके आधार पर उन्होंने इस रामायण की रचना की। इससे पहले मौलवी ने रामायण नहीं सुनी थी। बाद में इस रामायण को प्रतियोगिता में भेजा गया, जहां इसे सबसे अच्छी रामायण मानते हुए गोल्ड मेडल से नवाजा गया।

उस जमाने में महाराजा गंगा सिंह ने इसे आठवीं के कोर्स में शामिल किया था। बाद में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने भी इसे कोर्स में रखा, हालांकि अब नहीं है।
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